जालौर दुर्ग - जालौर दुर्ग को सुवर्ण गिरी तथा कनकाचल दुर्गा भी कहा जाता है जो सुकड़ी नदी के किनारे है इस दुर्ग में मलिक शाह पीर की दरगाह है
1311 ईस्वी में जालौर पर आक्रमण करने वाली खिलजी सेना का सेनापति मलिक नाईब कमालुद्दीन गुर्गथा पर प्रारंभ में उसे कोई सफलता नहीं मिली किंतु कान्हड़दे के सेनापति दहिया बीका ने कान्हड़देव के साथ विश्वासघात किया व दुर्ग की गुप्त सुरंग का रास्ता खिलजी सेना को बता दिया।
दहिया के इस विश्वासघात का पता चलने पर उसकी पत्नी हीरादे ने दहिया को मार डाला।
कान्हड़दे के नेतृत्व में चौहान सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए तथा जैतालदे के नेतृत्व में किले की स्त्रियों ने जौहर किया।
अलाउद्दीन खिलजी नेजालौर का नाम अलाउद्दीन ने जलालाबाद रख दिया( यह इस तथ्य को उल्लेखित करना प्रासंगिक होगा के अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नाम खिज्राबाद , सिवाना दुर्ग का नाम खैराबाद तथा जालौर दुर्ग का नाम जलालाबाद कर दिया था)
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1311 ईस्वी में जालौर पर आक्रमण करने वाली खिलजी सेना का सेनापति मलिक नाईब कमालुद्दीन गुर्गथा पर प्रारंभ में उसे कोई सफलता नहीं मिली किंतु कान्हड़दे के सेनापति दहिया बीका ने कान्हड़देव के साथ विश्वासघात किया व दुर्ग की गुप्त सुरंग का रास्ता खिलजी सेना को बता दिया।
दहिया के इस विश्वासघात का पता चलने पर उसकी पत्नी हीरादे ने दहिया को मार डाला।
कान्हड़दे के नेतृत्व में चौहान सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए तथा जैतालदे के नेतृत्व में किले की स्त्रियों ने जौहर किया।
अलाउद्दीन खिलजी नेजालौर का नाम अलाउद्दीन ने जलालाबाद रख दिया( यह इस तथ्य को उल्लेखित करना प्रासंगिक होगा के अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नाम खिज्राबाद , सिवाना दुर्ग का नाम खैराबाद तथा जालौर दुर्ग का नाम जलालाबाद कर दिया था)
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𝐆𝐊 𝐒𝐓𝐔𝐃𝐘 𝐏𝐎𝐈𝐍𝐓 ™
अलवर प्रजा मंडल...... अच्छा प्रश्न ❤️👍🏼
2 फरवरी 1946 को जब प्रजामण्डल का एक सम्मेलन खेड़ा मंगलसिंह नामक जागीर में हो रहा था, तो इसे सरकार विरोधी मानकर, प्रजामण्डल कार्यकारिणी के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके विरोध में 8 फरवरी 1946 को अलवर के विभिन्न कस्बों और गाँवों में दमनविरोधी दिवस मनाया गया। अन्त में हीरालाल शास्त्री की मध्यस्थता में प्रजा मण्डल और महाराजा के बीच समझौता हुआ, जिसके फलस्वरूप 10 फरवरी 1946 को आन्दोलनकारी रिहा कर दिये गये❤️👍🏼
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धरमत का युद्ध : 16 अप्रैल 1658 को औरंगजेब व दाराशिकोह के मध्य उत्तराधिकारी का युद्ध हुआ था। इस युद्ध में दाराशिकोह की शाही सेना का नेतृत्व मारवाड़ शासक जसवंत सिंह प्रथम कर रहा था। औरंगजेब ने दाराशिकोह की शाही सेना को पराजित किया।
• सामूगढ़ का युद्ध : 29 मई 1658 औरंगजेब व मुराद की संयुक्त सेना व दाराशिकोह की शाही सेना के मध्य हुआ। इस युद्ध में दाराशिकोह की शाही सेना पराजित हुई।
• खजुआ का युद्ध : 5 जनवरी 1659 मुगल सम्राट औरंगजेब व शाह शुजा के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में मारवाड़ शासक जसवंतसिंह-प्रथम ने औरंगजेब का साथ दिया।
• सामूगढ़ का युद्ध : 29 मई 1658 औरंगजेब व मुराद की संयुक्त सेना व दाराशिकोह की शाही सेना के मध्य हुआ। इस युद्ध में दाराशिकोह की शाही सेना पराजित हुई।
• खजुआ का युद्ध : 5 जनवरी 1659 मुगल सम्राट औरंगजेब व शाह शुजा के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में मारवाड़ शासक जसवंतसिंह-प्रथम ने औरंगजेब का साथ दिया।
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जोधपुर में प्राचीन राजाओं की छतरियों व उद्यानों के लिए प्रसिद्ध स्थान का नाम है-मण्डोर💐
9 नवंबर 1570 ई. को अकबर ने राजपूताना में किस स्थान पर दरबार लगाया जिसमें कई राजपूत शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार की- नागौर💐
जसवंत सिंह के वैध पुत्र अजीतसिंह को मारवाड़ का शासक बनाने हेतु मुगलों से 30 वर्षीय युद्ध लड़ने वाला राजपुत था- दुर्गादास राठौड़💐
किस मारवाड़ शासक के समय "आंवल-बांवल की संधि द्वारा मेवाड़ व मारवाड़ की सीमा का निर्धारण किया गया -राव जोधा💐
जोधपुर के किस शासक की मृत्यु आगरा में हुई तथा अंतिम संस्कार यमुना नदी के किनारे किया गया_: राव गजसिंह💐
वीर दुर्गादास की छतरी कहाँ स्थित है क्षिप्रा नदी तट (उज्जैन)💐
मारवाड़ राजकुमार अजीत सिंह के सुरक्षित पालन-पोषण हेतु वीर दुर्गादास राठौड़ को मेवाड़ के किस शासक ने अपने यहाँ शरण देकर केलवा की जागीर प्रदान की थी _:राजसिंह
दुर्गादास राठौड़ ने राजकुमार अजीतसिंह व रानियों को किस महिला की मदद से औरंगजेब के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित निकाला - गौरांधाय व बाघेली💐
मारवाड़ (जोधपुर) का कौनसा शासक नाथ संप्रदाय का अनुयायी हो गया तथा उसने जोधपुर के मठ "महामंदिर" का निर्माण करवाया महाराजा मानसिंह💐
वीर दुर्गादास ने राठौड़ वंश के शिशु राजकुमार अजीतसिंह को सिरोही में किसके पास रखा-पुष्करणा ब्राह्मण जयदेव💐
राजपूताना के राठौड़ वंश की पहली राजधानी भी_: मण्डोर💐
मुगल सम्राट जहाँगीर ने "दलथम्भन" की उपा किसे प्रदान कीथी - महाराणा गजसिंह💐
#important #फैक्ट ❤️☘
9 नवंबर 1570 ई. को अकबर ने राजपूताना में किस स्थान पर दरबार लगाया जिसमें कई राजपूत शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार की- नागौर💐
जसवंत सिंह के वैध पुत्र अजीतसिंह को मारवाड़ का शासक बनाने हेतु मुगलों से 30 वर्षीय युद्ध लड़ने वाला राजपुत था- दुर्गादास राठौड़💐
किस मारवाड़ शासक के समय "आंवल-बांवल की संधि द्वारा मेवाड़ व मारवाड़ की सीमा का निर्धारण किया गया -राव जोधा💐
जोधपुर के किस शासक की मृत्यु आगरा में हुई तथा अंतिम संस्कार यमुना नदी के किनारे किया गया_: राव गजसिंह💐
वीर दुर्गादास की छतरी कहाँ स्थित है क्षिप्रा नदी तट (उज्जैन)💐
मारवाड़ राजकुमार अजीत सिंह के सुरक्षित पालन-पोषण हेतु वीर दुर्गादास राठौड़ को मेवाड़ के किस शासक ने अपने यहाँ शरण देकर केलवा की जागीर प्रदान की थी _:राजसिंह
दुर्गादास राठौड़ ने राजकुमार अजीतसिंह व रानियों को किस महिला की मदद से औरंगजेब के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित निकाला - गौरांधाय व बाघेली💐
मारवाड़ (जोधपुर) का कौनसा शासक नाथ संप्रदाय का अनुयायी हो गया तथा उसने जोधपुर के मठ "महामंदिर" का निर्माण करवाया महाराजा मानसिंह💐
वीर दुर्गादास ने राठौड़ वंश के शिशु राजकुमार अजीतसिंह को सिरोही में किसके पास रखा-पुष्करणा ब्राह्मण जयदेव💐
राजपूताना के राठौड़ वंश की पहली राजधानी भी_: मण्डोर💐
मुगल सम्राट जहाँगीर ने "दलथम्भन" की उपा किसे प्रदान कीथी - महाराणा गजसिंह💐
#important #फैक्ट ❤️☘
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