राजस्थान में वृद्धावस्था, विधवा/एकल नारी, दिव्यांगजन तथा लघु एवं सीमान्त कृषकों को दी जाने वाली मासिक पेंशन राशि बढ़ाकर कितनी कर दी गई है?
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4%
1200 रुपये
32%
1250 रूपये
57%
1300 रुपये
7%
1350 रुपये
❤13👍7😍3
18 फरवरी 2026 को आचार्य तुलसी कैंसर रिसर्च सेंटर परिसर में प्रदेश की दूसरी डायमंड्स लैब कहाँ शुरू हुई है?
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32%
जयपुर
34%
जोधपुर
32%
बीकानेर
1%
कोटा
❤9👍4😍3
18 फरवरी 2026 को शेर-ए-राजस्थान स्व. जयनारायण व्यास की कौन-सी जयंती मनाई गई?
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10%
125वीं
45%
126वीं
41%
127वीं
5%
128वीं
❤11👍5😍3
जयपुर के ऐतिहासिक जलमहल पर 20 और 22 फरवरी 2026 को किसकी प्रसिद्ध एरोबेटिक टीम द्वारा एयर शो आयोजित किया जा रहा है?
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6%
आकाश गंगा टीम
26%
गरुड़ कमांडो टीम
37%
सारंग हेलीकॉप्टर टीम
32%
सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम
👍8❤6😍5
स्वरूप सिंह (1842-61)
समाजसुधार कार्य-
(1) कन्यावध निषेध 1844
(2) डाकन प्रथा निषेध 1853
(3) सती प्रथा निषेध 1861
विजयस्तम्भ की 9वीं मंजिल का पुर्ननिर्माण करवाया। 1857 की क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया। इसकी मृत्यु पर पासवान ऐजाबाई सती हुईं, मेवाड़ की अंतिम सती।
#important ❤️☘
समाजसुधार कार्य-
(1) कन्यावध निषेध 1844
(2) डाकन प्रथा निषेध 1853
(3) सती प्रथा निषेध 1861
विजयस्तम्भ की 9वीं मंजिल का पुर्ननिर्माण करवाया। 1857 की क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया। इसकी मृत्यु पर पासवान ऐजाबाई सती हुईं, मेवाड़ की अंतिम सती।
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❤8😍4👍3
ज्ञान समुद्र, बावनी, बारह अष्टक सवैया सर्वांग योग प्रदीपिका सुंदरदास जी कि प्रमुख रचनाएँ थीं (पूछा गया सवाल)
#important ❤️👍
#important ❤️👍
❤5👍5😍4
🐄 मां कात्यायनी देवी पशुमेला–2026
📍 स्थान :- सायला, जालोर (15–19 फरवरी)
☞ उद्देश्य :- पशुपालकों को मंच, उन्नत नस्लों व व्यापार को बढ़ावा
☞ मुख्य गतिविधियां :- पशु प्रतियोगिताएं, प्रदर्शनी, खरीद–फरोख्त
☞ स्थानीय संस्कृति व पशुपालन को प्रोत्साहन
📍 स्थान :- सायला, जालोर (15–19 फरवरी)
☞ उद्देश्य :- पशुपालकों को मंच, उन्नत नस्लों व व्यापार को बढ़ावा
☞ मुख्य गतिविधियां :- पशु प्रतियोगिताएं, प्रदर्शनी, खरीद–फरोख्त
☞ स्थानीय संस्कृति व पशुपालन को प्रोत्साहन
❤10👍3😍1
🪨 राजस्थान की ऊर्जा स्थिति ✅
नए आंकड़े आर्थिक समीक्षा 2025-26
❤13😍5👍3
आप सगळा ने मायड़ भाषा दिवस री घणी-घणी बधाइयां 💐
😍11❤9👍7
न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) ⚖️
1️⃣ अर्थ एवं परिभाषा
🔹 अभिप्राय: न्यायालय द्वारा कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका के कार्यों की वैधता की जाँच करना।
🔹 कार्य: कानूनों तथा प्रशासनिक निर्णयों की संवैधानिकता की जाँच करना।
🔹 परिणाम: यदि कोई कानून या नीति संविधान के किसी प्रावधान का अतिक्रमण करती है, तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है।
2️⃣ उद्गम एवं प्रेरणा
🔹 भारत में यह शक्ति अमेरिकी संविधान से प्रेरित है।
3️⃣ न्यायिक पुनरावलोकन से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद
(यद्यपि ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ शब्द संविधान में उल्लेखित नहीं है, निम्न अनुच्छेद इसका आधार हैं)
🔹 अनुच्छेद 13(2): राज्य द्वारा बनाया गया कोई भी कानून यदि मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है।
🔹 अनुच्छेद 32: मूल अधिकारों के उल्लंघन पर कोई भी नागरिक सीधे उच्चतम न्यायालय की शरण ले सकता है।
🔹 अनुच्छेद 132: संविधान की व्याख्या से संबंधित प्रश्नों पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है।
🔹 अनुच्छेद 246: संघ व राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन – उल्लंघन की स्थिति में कानून अवैध ठहराया जा सकता है।
🔹 अनुच्छेद 368: यदि संविधान संशोधन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं किया गया हो, तो न्यायालय उसे अवैध घोषित कर सकता है।
4️⃣ क्षेत्राधिकार (Scope)
🔹 यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय दोनों के पास है।
5️⃣ प्रमुख विशेषताएँ
🔹 मूल संरचना सिद्धांत के अंतर्गत न्यायिक समीक्षा को संविधान की मूलभूत विशेषता माना गया है।
🔹 इसे न तो संविधान संशोधन द्वारा हटाया जा सकता है और न ही सीमित किया जा सकता है।
6️⃣ संशोधनों से संबंधित बिंदु
🔹 38वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (1975): राष्ट्रपति के निर्णय को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर किया गया था।
🔹 44वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (1978): उक्त प्रावधान समाप्त कर दिया गया।
🔹 वर्तमान स्थिति: राष्ट्रपति शासन के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
7️⃣ महत्वपूर्ण तथ्य
🔹 ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ शब्द संविधान में शाब्दिक रूप से नहीं है, परंतु विभिन्न अनुच्छेदों के माध्यम से यह शक्ति सुनिश्चित की गई है।
1️⃣ अर्थ एवं परिभाषा
🔹 अभिप्राय: न्यायालय द्वारा कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका के कार्यों की वैधता की जाँच करना।
🔹 कार्य: कानूनों तथा प्रशासनिक निर्णयों की संवैधानिकता की जाँच करना।
🔹 परिणाम: यदि कोई कानून या नीति संविधान के किसी प्रावधान का अतिक्रमण करती है, तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है।
2️⃣ उद्गम एवं प्रेरणा
🔹 भारत में यह शक्ति अमेरिकी संविधान से प्रेरित है।
3️⃣ न्यायिक पुनरावलोकन से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद
(यद्यपि ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ शब्द संविधान में उल्लेखित नहीं है, निम्न अनुच्छेद इसका आधार हैं)
🔹 अनुच्छेद 13(2): राज्य द्वारा बनाया गया कोई भी कानून यदि मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है।
🔹 अनुच्छेद 32: मूल अधिकारों के उल्लंघन पर कोई भी नागरिक सीधे उच्चतम न्यायालय की शरण ले सकता है।
🔹 अनुच्छेद 132: संविधान की व्याख्या से संबंधित प्रश्नों पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है।
🔹 अनुच्छेद 246: संघ व राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन – उल्लंघन की स्थिति में कानून अवैध ठहराया जा सकता है।
🔹 अनुच्छेद 368: यदि संविधान संशोधन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं किया गया हो, तो न्यायालय उसे अवैध घोषित कर सकता है।
4️⃣ क्षेत्राधिकार (Scope)
🔹 यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय दोनों के पास है।
5️⃣ प्रमुख विशेषताएँ
🔹 मूल संरचना सिद्धांत के अंतर्गत न्यायिक समीक्षा को संविधान की मूलभूत विशेषता माना गया है।
🔹 इसे न तो संविधान संशोधन द्वारा हटाया जा सकता है और न ही सीमित किया जा सकता है।
6️⃣ संशोधनों से संबंधित बिंदु
🔹 38वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (1975): राष्ट्रपति के निर्णय को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर किया गया था।
🔹 44वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (1978): उक्त प्रावधान समाप्त कर दिया गया।
🔹 वर्तमान स्थिति: राष्ट्रपति शासन के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
7️⃣ महत्वपूर्ण तथ्य
🔹 ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ शब्द संविधान में शाब्दिक रूप से नहीं है, परंतु विभिन्न अनुच्छेदों के माध्यम से यह शक्ति सुनिश्चित की गई है।
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