हम्मीर हठ..... चन्द्र शेखर
हम्मीर रासो... जोधराज
हम्मीररायण.... भढ़ाऊं व्यास
हम्मीर महाकाव्य... नयनचंद्र सूरी
#important ❤️👍
हम्मीर रासो... जोधराज
हम्मीररायण.... भढ़ाऊं व्यास
हम्मीर महाकाव्य... नयनचंद्र सूरी
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❤30
राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में राजस्थानी भाषा को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार प्लॉट नंबर 302 को दिया गया है
हाल ही में कवि काग पुरस्कार लक्ष्मणदान कविया को दिया गया है।
जल जीवन मिशन की अवधि को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
#important ❤️👍🏼
हाल ही में कवि काग पुरस्कार लक्ष्मणदान कविया को दिया गया है।
जल जीवन मिशन की अवधि को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
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❤26
चम्बल परियोजना की शुरुआत 1953-54 में हुई, इस परियोजना में राजस्थान व मध्यप्रदेश का 50:50 हिस्सा है। चम्बल नदी पर 4 बाँध बने हैं -
1. गाँधीसागर (मन्दसौर, मध्यप्रदेश)
2. राणाप्रताप सागर ( रावतभाटा, चित्तौड़गढ़)
3. जवाहर सागर बाँध (बोरावास, कोटा)
4. कोटा बैराज/कोटा सिंचाई बाँध
• कोटा बैराज पर चम्बल नदी सर्वाधिक प्रदूषित हुई है।।
#important ❤️☘
1. गाँधीसागर (मन्दसौर, मध्यप्रदेश)
2. राणाप्रताप सागर ( रावतभाटा, चित्तौड़गढ़)
3. जवाहर सागर बाँध (बोरावास, कोटा)
4. कोटा बैराज/कोटा सिंचाई बाँध
• कोटा बैराज पर चम्बल नदी सर्वाधिक प्रदूषित हुई है।।
#important ❤️☘
❤21👏6
• मारवाड़ी व्याकरण : रामकरण आसोपा [प्रकाशन 1896 ईस्वी में]
• राजस्थांनी व्याकरण : सीताराम लालस [नैरवा निवासी]
• राजस्थानी भाषा में रामायण के रचयिता : हनुमंत किंकर
• राजस्थानी रामायण : समय सुंदर [समय सुंदर जी ने सीताराम चौपाई लिखी है जिसे राजस्थानी रामायण" कहा जाता है।]
#important
• राजस्थांनी व्याकरण : सीताराम लालस [नैरवा निवासी]
• राजस्थानी भाषा में रामायण के रचयिता : हनुमंत किंकर
• राजस्थानी रामायण : समय सुंदर [समय सुंदर जी ने सीताराम चौपाई लिखी है जिसे राजस्थानी रामायण" कहा जाता है।]
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👌9❤7❤🔥1🥰1👏1
1857 की क्रान्ति के समय राजस्थान में छः सैनिक छावनियाँ थी-
(1) नसीराबाद (अजमेर): 15वीं बंगाल नेटिव इन्फन्ट्री
(2) नीमच (मध्यप्रदेश) : फर्स्ट बंगाल केवेलरी
(3) ब्यावर (ब्यावर) : मेरवाड़ा बटालियन
(4) देवली (टोंक) : कोटा कन्टिनजेन्ट
(5) एरिनपुरा (पाली) : जोधपुर लीजियन
(6) खैरवाड़ा (उदयपुर) : मेवाड़ भील कोर
नोट : 1857 की क्रान्ति के समय 6 सैनिक छावनियों में 5000 सैनिक थे, परन्तु उनमें एक भी युरोपीय नहीं था
#important
(1) नसीराबाद (अजमेर): 15वीं बंगाल नेटिव इन्फन्ट्री
(2) नीमच (मध्यप्रदेश) : फर्स्ट बंगाल केवेलरी
(3) ब्यावर (ब्यावर) : मेरवाड़ा बटालियन
(4) देवली (टोंक) : कोटा कन्टिनजेन्ट
(5) एरिनपुरा (पाली) : जोधपुर लीजियन
(6) खैरवाड़ा (उदयपुर) : मेवाड़ भील कोर
नोट : 1857 की क्रान्ति के समय 6 सैनिक छावनियों में 5000 सैनिक थे, परन्तु उनमें एक भी युरोपीय नहीं था
#important
❤22
हल्दीघाटी युद्ध में हाथियों का युद्ध भी हुआ था। जिसमें निम्न हाथियों ने भाग लिया था।
• मरदाना : मानसिंह का हाथी
• हवाई : अकबर का हाथी
• रामप्रसाद : महाराणा प्रताप का हाथी था। मुगलों ने इसको पकड़ लिया था। हल्दीघाटी युद्ध के बाद मुगलों ने इसका नाम पीरप्रसाद कर दिया था।
• लूणा : महाराणा प्रताप का हाथी
• मुगलों के अन्य हाथी : गजमुक्ता, गजराज, एवम् रनमदार
#important ❤️👍🏼👍🏼
• मरदाना : मानसिंह का हाथी
• हवाई : अकबर का हाथी
• रामप्रसाद : महाराणा प्रताप का हाथी था। मुगलों ने इसको पकड़ लिया था। हल्दीघाटी युद्ध के बाद मुगलों ने इसका नाम पीरप्रसाद कर दिया था।
• लूणा : महाराणा प्रताप का हाथी
• मुगलों के अन्य हाथी : गजमुक्ता, गजराज, एवम् रनमदार
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🔥14❤7🎉1
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह का निर्माण इल्तुतमीश द्वारा प्रारम्भ करवाया गया। इसकी मुख्य मजार का निर्माण मांडु सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी द्वारा करवाया गया।
इसके मुख्य प्रवेश द्वार 'निजाम द्वार' का निर्माण हैदराबाद के निजाम 'मीर उस्मान अली खान' द्वारा करवाया गया।
दो देग- लाली
(1) बड़ी देग-अकबर द्वारा भेंट
(2) छोटी देग-जहाँगीर द्वारा भेंट
#important ❤️👍
इसके मुख्य प्रवेश द्वार 'निजाम द्वार' का निर्माण हैदराबाद के निजाम 'मीर उस्मान अली खान' द्वारा करवाया गया।
दो देग- लाली
(1) बड़ी देग-अकबर द्वारा भेंट
(2) छोटी देग-जहाँगीर द्वारा भेंट
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❤26👏5🤩2🔥1🙏1
गोविन्द गुरु का जन्म 20 दिसम्बर, 1858 को डूंगरपुर जिले के बांसिया (बेड़िया) गांव में एक बंजारा परिवार में हुआ था , वागड़ क्षेत्र में उन्होंने महर्षि दयानन्द की प्रेरणा से उन्होंने अपना जीवन देश, धर्म और समाज की सेवा में समर्पित करने का निर्णय लिया, उनके द्वारा इस क्षेत्र में भगत आंदोलन चलाया गया जिसमें सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिये अग्नि देवता को प्रतीक माना। अपने अनुयायियों को पवित्र अग्नि के समक्ष खड़े होकर पूजा के साथ-साथ हवन ( अर्थात् धूनी) करना होता था।
इससे पहले इन्होने 1883 में उन्होने सम्प सभा की स्थापना की।
उसके बाद वो 1908-09 के आस पास गुजरात में चले गये और 1911-12 में राजस्थान के सीमावर्ती बेडसा नामक स्थान को गतिविधियों का केंद्र बनाया!
#important ❤️☘👆
इससे पहले इन्होने 1883 में उन्होने सम्प सभा की स्थापना की।
उसके बाद वो 1908-09 के आस पास गुजरात में चले गये और 1911-12 में राजस्थान के सीमावर्ती बेडसा नामक स्थान को गतिविधियों का केंद्र बनाया!
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❤23
गोविन्द गुरु का जन्म 20 दिसम्बर, 1858 को डूंगरपुर जिले के बांसिया (बेड़िया) गांव में एक बंजारा परिवार में हुआ था , वागड़ क्षेत्र में उन्होंने महर्षि दयानन्द की प्रेरणा से उन्होंने अपना जीवन देश, धर्म और समाज की सेवा में समर्पित करने का निर्णय लिया, उनके द्वारा इस क्षेत्र में भगत आंदोलन चलाया गया जिसमें सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिये अग्नि देवता को प्रतीक माना। अपने अनुयायियों को पवित्र अग्नि के समक्ष खड़े होकर पूजा के साथ-साथ हवन ( अर्थात् धूनी) करना होता था।
इससे पहले इन्होने 1883 में उन्होने सम्प सभा की स्थापना की।
उसके बाद वो 1908-09 के आस पास गुजरात में चले गये और 1911-12 में राजस्थान के सीमावर्ती बेडसा नामक स्थान को गतिविधियों का केंद्र बनाया!
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इससे पहले इन्होने 1883 में उन्होने सम्प सभा की स्थापना की।
उसके बाद वो 1908-09 के आस पास गुजरात में चले गये और 1911-12 में राजस्थान के सीमावर्ती बेडसा नामक स्थान को गतिविधियों का केंद्र बनाया!
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❤22
साड़ियों के विविध रूप - चोल, निकोल/निचोल, पट, दुकुल, अंसुक, चीर, पटोरी, चोरसो,धोरावली आदि साड़ियों के विविध रूप है।
#important ❤️☘
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❤19👏2
दामणी : मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित लाल रंग की ओढ़नी,जिस पर धागे से कशीदाकारी की होती है।
ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।
#important ❤️☘
ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।
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❤23👏4
जयानक : पृथ्वीराज विजय
नयनचन्द्र सूरी : हम्मीर महाकाव्य
चन्द्रशेखर : सुर्जन चरित्र
हरिभद्र सूरी : समराइच्चकहा
#important ❤️☘
नयनचन्द्र सूरी : हम्मीर महाकाव्य
चन्द्रशेखर : सुर्जन चरित्र
हरिभद्र सूरी : समराइच्चकहा
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❤48😢7
(1)मानप्रकाश:मुरारीदास
(2) मानसिंह कीर्ति मुक्तावली:जगन्नाथ
(3) मानचरित्र:कवि नरोत्तम
(4) मानचरित्र:अमृतराय
(5) पत्र प्रशस्ति, पवन कल्याण:दलपतराय
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(2) मानसिंह कीर्ति मुक्तावली:जगन्नाथ
(3) मानचरित्र:कवि नरोत्तम
(4) मानचरित्र:अमृतराय
(5) पत्र प्रशस्ति, पवन कल्याण:दलपतराय
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❤30🔥1
मानसिंह द्वारा काबुल (अफगानिस्तान) के पाँच कबीलों पर विजय उपरान्त इन पठान कबीलों ने अपने ध्वज /पगड़ी का हिस्सा फाड़कर राजा मानसिंह को दिया। इन ध्वज या पगड़ी के कपड़े के पाँच रंगों (नीले, पीले, लाल, हरे, काले) से मिलकर जयपुर का पचरंगा झण्डा बना। इससे पूर्व जयपुर ध्वज सफेद रंग का हुआ करता था।
#important ❤️☘
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❤28👏3
ब्लू पॉटरी......( मुख्य कलाकार)
कृपाल सिंह शेखावत, नाथी बाई, मीनाक्षी राठौड़, गोपाल सैनी, दुर्गालाल,
#important ❤️👍
कृपाल सिंह शेखावत, नाथी बाई, मीनाक्षी राठौड़, गोपाल सैनी, दुर्गालाल,
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❤29🎉2
मीनाकारी कला......
कलाकार... मुन्नालाल, दुर्गा सिंह, कैलाशचंद्र, काशीनाथ
सोने पर मीनाकारी... प्रतापगढ़
चांदी पर मीनाकारी.... नाथद्वारा
पीतल पर मीनाकारी... अलवर
तांबे पर मीनाकारी.... भीलवाड़ा
कांच पर मीनाकारी.... कोटा
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कलाकार... मुन्नालाल, दुर्गा सिंह, कैलाशचंद्र, काशीनाथ
सोने पर मीनाकारी... प्रतापगढ़
चांदी पर मीनाकारी.... नाथद्वारा
पीतल पर मीनाकारी... अलवर
तांबे पर मीनाकारी.... भीलवाड़ा
कांच पर मीनाकारी.... कोटा
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❤39🔥4🤩1
स्वरूप सिंह (1842-61)
समाजसुधार कार्य-
(1) कन्यावध निषेध 1844
(2) डाकन प्रथा निषेध 1853
(3) सती प्रथा निषेध 1861
विजयस्तम्भ की 9वीं मंजिल का पुर्ननिर्माण करवाया। 1857 की क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया। इसकी मृत्यु पर पासवान ऐजाबाई सती हुईं, मेवाड़ की अंतिम सती।
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समाजसुधार कार्य-
(1) कन्यावध निषेध 1844
(2) डाकन प्रथा निषेध 1853
(3) सती प्रथा निषेध 1861
विजयस्तम्भ की 9वीं मंजिल का पुर्ननिर्माण करवाया। 1857 की क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया। इसकी मृत्यु पर पासवान ऐजाबाई सती हुईं, मेवाड़ की अंतिम सती।
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❤26
हमारी सरकार ने महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पहले चरण में 500 कालिका पेट्रोलिंग यूनिट का संचालन किया है। तीन महिला बटालियन और 65 एंटी रोमियो स्क्वॉड की पहल की है
#important
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❤30🔥7🍾2
पोत, निबोरी, तिमणिया, तुलसी, जुमावली, चोकी, झालरो, गुंजमाला, गुंजा, चम्पाकली, हंसहार, कंठ साड़ी, कंठमला, हार, चन्द्रहार आदि गले के आभूषण थे।
बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।
अंगूठी, विनती, मुंदरी, दामचा (दवनो), नथ-पान आदि हाथ की अंगुलियों के आभूषण थे।
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बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।
अंगूठी, विनती, मुंदरी, दामचा (दवनो), नथ-पान आदि हाथ की अंगुलियों के आभूषण थे।
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