प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
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This Rational Channel is made to clarify doubts and Allegations on Sanatan dharma. I am a Neutral Agnostic & Non sectarian Vedic.

Doubts and Debates are certainly Welcome. No abuses please.

मर्यादा का उल्लंघन ना करें ।
Krishnam Vande Jagadgurum 🙏
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1st century BCE old Statue of Indra , where Gaja Lakshmi is standing on the top of it.

Founded from Bodhgaya and belongs to 50 BCE.

Source : Mauryan and Sunga Art , Nihar Ranjan Ray , Central Archaeological Library


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वंदे वांछितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम |
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्‌ ||

नवरात्रि पर्व के प्रथम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

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देवी के परम मंगलमय इतिहास की चर्चा में हम आज देवी उमा (पार्वती) के बारे में कुछ विशेष बताएंगे।

देवी उमा वेदों की ज्ञाता थीं। वह उन्हें पुण्यक विधि से पहले उद्धृत करती है।
वह अखंडनीय सर्वकालिक धर्मचारिणी थीं , इसीलिए उन्होंने सभी पुण्यक अनुष्ठान किये।

स्रोत: हरिवंश पुराण, विष्णुपर्व अध्याय 78


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देवी पार्वती संसार के सभी प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती थीं ।

वह सर्वज्ञ (सभी शास्त्रों और विद्याओं को जानने वाली) थी। भगवान शिव ने उन्हें कई बार धर्म और उसके आचरण के संबंध में उपदेश दिये थे ।

Source : हरिवंश पुराण, विष्णु पर्व, अध्याय 77/25 एवं 78/1


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देवी पार्वती का उपनयन संस्कार भी हुआ था। राजा हिमवान ने वेदमंत्रों का जाप से यथावत देवी पार्वती और भगवान शिव का उपनयन संपन्न किया था।


चूँकि यह पूरा समारोह उनकी शादी से ठीक पहले किया गया था, देवी पार्वती ऋषि हारित और यम के अनुसार सद्योवधु थीं।

कुमारसंभवम के अनुसर देवी पार्वती ने भी समस्त विद्याओं का ज्ञान बचपन में ही ग्रहण कर लिया था।
इसके अलावा उनके उपनयन की पुष्टि भी कुमारसंभवम् द्वारा की जाती है।

तप, स्वाध्याय और दैनिक यज्ञ करना उनके घोर तपस्या में प्रतिदिन का कार्य था।
उनके तप को देख कर ऋषि भी आश्चर्यचकित हो गए।

स्रोत: शिवपुराण, रुद्र संहिता, पार्वती खंड, 47/1, कालिदास कृत कुमारसंभवम्

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अनिरुद्धकृत आर्यास्तव के अनुसार, देवी पार्वती एक वीर योद्धा थीं, जिन्होंने अनिरुद्ध की नागपाश से रक्षा की थी। उनका अपने मन और सभी इंद्रियों पर नियन्त्रण था। इसके अलावा देवी ने कई बार दैत्य सेना के विरुद्ध जाकर उनसे युद्ध भी किया और वह हमेशा विजयी रहीं।

वास्तविकता में तो देवी ने अपना आर्या नाम ; बिल्कुल सार्थक बना लिया।


धनुर्वेद में अपनी उत्कृष्टता के कारण, वह सभी दुष्ट दानव और दैत्यों के लिए एक दुःस्वप्न थी। वह धर्म और संसार की रक्षक थी।

स्रोत: हरिवंश, विष्णु पर्व, अध्याय 120


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इतना स्पष्ट लिखने के बावजूद भी कुछ लोगों के मुख से मेरे लिए अत्यंत कल्याणकारी शब्द प्रवाहित हो रहे हैं ।

अगर केवल देवी मां के आधिदैविक पक्ष पर बात करनी होती तो मैंने ये पोस्ट ही ना बनाई होती ।
जब मैं इतिहास का विषय चुना है तो मैं उस पर ही बात करूंगा ।

और जो लोग मुझे आर्यसमाजी बोल रहे हैं , उनसे अनुरोध है कि इस तरह की फालतू बकैती तब तक ना करें जब तक आपके पास कोई प्रमाण न हो ।

मैं ना तो खुद को कभी आर्यसमाजी कहा था और ना कभी आगे कहने का कोई इरादा है ; बस बात ख़त्म ।



~ Mystical Garuda 🦅
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Gandhara was a major center of Vedic religion before Buddhism entered the area in the 3rd century BCE.

The existence of Vedas and Vedic dharma is already proven much older than Buddhism 🗿🗿

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" ब्रह्मचर्येण कन्या युवानं विन्दते पतिम् । "

~ अथर्ववेद ब्रह्मचर्यसूक्त ( ११/५/१८ )

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥ 🙏🙏

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पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता ।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥

Jayatu Devi 🙏

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नवरात्रि के चतुर्थ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
माता कूष्माण्डा देवी सबका मंगल करें ।

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Historicity of Shaktism : Debunking Rishi uvach #1


Antiquity of Shaktism and history of Worshipping Maa Adishakti in Paleolithic times as Mother Goddess ( Prakriti )..
Unlike Uvach's claim which was utterly Baseless + not even a single evidence was provided even after my counter questions.

Source :- Pre historic South India , by Famous historian Ramachandra Dikshitar ji 😎🙏


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