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📕 राष्ट्रीय महिला आयोग

👉 राष्ट्रीय महिला आयोग एक सांविधिक निकाय है इसका गठन जनवरी 1992 में महिला सशक्तिकरण को प्रभावी बनाने हेतु राष्ट्रीय महिला अधिनियम 1990 के तहत किया गया l

👉उद्देश्य - भारत में महिलाओं के अधिकारों का प्रतिनिधित्व करना और उनके मुद्दों और चिंताओं के लिए आवाज़ उठाना है।
आयोग अध्यक्ष
◾️ पहला आयोग (1992) - जयंती पटनायक
◾️ दूसरा आयोग (1995) - मोहिनी गिरी
◾️ तीसरा आयोग (1999) - विभा पार्थ सारथी
◾️ चौथा आयोग (2002) - डॉ.पूर्णिमा आडवाणी
◾️ पांचवा आयोग (2005) - डॉक्टर गिरिजा व्यास
◾️ छठवाँ आयोग (2011) - ममता शर्मा
◾️सातवां आयोग (2014) - ललित कुमार मंगलम
▪️आठवां आयोग (2018) - रेखा शर्मा
▪️नौवीं आयोग ( 2024) - विजया किशोर रहाटकर

नोट👉▪️राष्ट्रीय महिला दिवस - 13 फरवरी
▪️अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस - 08 मार्च

📕 उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का गठन 2002 में हुआ

📕  उ.प्र. राज्य महिला आयोग अधिनियम 2004

📕वर्तमान में अध्यक्ष बबीता चौहान है

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📕Biology की कुछ महत्वपूर्ण शाखाएँ

1. एन्‍थोलॉजी (Anthology) - पुुष्‍पों का अध्‍ययन

2. सिल्विकल्चर (Silviculture) - काष्ठी पेड़ों का संवर्धन (जंगल विज्ञान)

3.  सॉरोलॉजी (Saurology) - छिपकलियों का अध्ययन

4. माइकोलॉजी (Mycology) - कवकों का अध्ययन

5. फाइकोलॉजी (Phycology) - शैवालों का अध्ययन

6. पोमोलॉजी (Pomology) - फलों का अध्ययन

7. ऑर्निथोलॉजी (Ornithology) - पक्षियों का अध्ययन

8. इक्थ्योलॉजी (Ichthyology) - मछलियों का अध्ययन

9. एण्टोमोलॉजी (Entomology) - कीटों का अध्ययन

10.डेन्‍ड्रोलॉजी (Dendrology) - वृक्षों एवं झाड़ियों का अध्ययन

11. ओफियोलॉजी (Ophiology) - सर्पों (snakes) का अध्ययन

12. पीसीकल्चर (Pisciculture) - मत्स्य पालन का अध्ययन

13. सेरीकल्वर (Sericulture) - रेशम कीट पालन का अध्ययन

14. एपीकल्चर (Apiculture) - मधुमक्खी पालन का अध्ययन

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📕सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की कार्य एवं शक्तियां

अनुच्छेद 129 - अभिलेख/रिकार्डड न्यायलय/अवमानना का दण्ड देने की शक्ति ।

👉अनुच्छेद 131 - प्रराम्भिक क्षेत्राधिकरण की शक्ति।

एक या एक से अधिक राज्यों या एक राज्य व राज्यों व भारत सरकार के मध्य कोई विवाद पर फैसला एस. सी. करेगी

👉अनुच्छेद 132 - अपीलय क्षेत्राधिकार।

👉अनुच्छेद 133 - दीवानी मामलों में अपील का अधिकार।

👉अनुच्छेद 134 - फौजदारी मामलों में अपील का अधिकार

👉अनुच्छेद 135 - सैन्य मामलों में अपील का अधिकार।

👉अनुच्छेद 136 - विशेष अपीळेल का अधिकार।

👉अनुच्छेद 137 - न्यायिक पूनावलोकन की शक्ति।

👉अनुच्छेद 141 - सुप्रिम कोट के सभी निर्णय सम्पुर्ण भारत में मान्य होंगे।

👉अनुच्छेद - 143 राष्ट्रपति का सुप्रिम कोट से परामर्श लेने का अधिकार।

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📕सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की कार्य एवं शक्तियां

अनुच्छेद 129 - अभिलेख/रिकार्डड न्यायलय/अवमानना का दण्ड देने की शक्ति ।

👉अनुच्छेद 131 - प्रराम्भिक क्षेत्राधिकरण की शक्ति।

एक या एक से अधिक राज्यों या एक राज्य व राज्यों व भारत सरकार के मध्य कोई विवाद पर फैसला एस. सी. करेगी

👉अनुच्छेद 132 - अपीलय क्षेत्राधिकार।

👉अनुच्छेद 133 - दीवानी मामलों में अपील का अधिकार।

👉अनुच्छेद 134 - फौजदारी मामलों में अपील का अधिकार

👉अनुच्छेद 135 - सैन्य मामलों में अपील का अधिकार।

👉अनुच्छेद 136 - विशेष अपीळेल का अधिकार।

👉अनुच्छेद 137 - न्यायिक पूनावलोकन की शक्ति।

👉अनुच्छेद 141 - सुप्रिम कोट के सभी निर्णय सम्पुर्ण भारत में मान्य होंगे।

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📕संसद का संविधान में संशोधन करने की शक्ति

शंकरी प्रसाद बनाम भारत सरकार, 1951

संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है।


सज्जन सिंह बनाम राजस्थान सरकार, 1965

. संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति है।


गोलक नाथ बनाम पंजाब सरकार, 1967

संसद को संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) में संशोधन करने का अधिकार नहीं है।

केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार, 1973

संसद के किसी भी प्रावधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन 'बुनियादी संरचना' को कमजोर नहीं कर सकती है।


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📕राज्य का राज्यपाल , विवेकानुसार कार्य 👉

1. विधानसभा में सरकार को अपना बहुमत सिद्ध करने को कहने के लिए।

2. अल्पमत में आए मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने के लिए।

3. किसी विधेयक पर अनुमति देने, अनुमति रोकने अथवा भारत के राष्ट्रपति के विचारार्थ उस विधेयक को आरक्षित करने के लिए (अनु. 200)।

4. विधायिका द्वारा पारित किसी विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस करने के लिए (अनु. 200 का परंतुक)।

🔥इनके अतिरिक्त राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने तथा विधानसभा के समय पूर्व विघटन जैसे कुछ अन्य संदर्भों में भी वह अपने विवेक का प्रयोग कर सकता है

🔥उसे उच्च न्यायालय से परामर्श मांगने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।

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📕 नवीं अनुसूची से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य


👉भारतीय संविधान (प्रथम) संशोधन अधिनियम, 1951 के जरिए संविधान में नौवीं अनुसूची तथा अनुच्छेद 31-क और 31-ख जोड़े गए।

👉संसद द्वारा विधि विशेष (यथा- भूमि सुधार विधियां) को नौवीं अनुसूची में रखा जा सकता है, जिन्हें न्यायिक समीक्षा से बचाव दिया जाना आशयित हो।

👉वर्तमान में (मई, 2022 की स्थिति अनुसार) नौवीं अनुसूची में ऐसी 282 विधियां शामिल हैं।

👉अनुच्छेद 31-ख यह कहता है कि नौवीं अनुसूची में उल्लिखित नियमों और विनियमों को इस आधार पर शून्य नहीं
समझा जाएगा कि वे भाग 3 के किन्हीं उपबंधों और प्रदत्त अधिकारों में से किसी से असंगत हैं या उनको छीन लेते हैं या न्यून करते हैं।

👉किंतु वर्ष 2007 में सर्वोच्च न्यायालय ने आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु के मामले में निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद को नौवीं अनुसूची में विधि विशेष को प्रविष्टि करने की शक्ति प्रदान की गई है, किंतु यह न्यायिक संवीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है।
👉न्यायालय ने निर्धारित किया कि 24 अप्रैल, 1973 (केशवानंद भारती वाद निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में शामिल किए गए विधायनों की न्यायिक समीक्षा इस आधार पर की जा सकेगी कि वे अनुच्छेद 21, 14 एवं 19 में प्रतिबिम्बित संविधान के मूल ढांचे की अवधारणा का उल्लंघन करते हैं।

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