UPSSSC, LOWER PCS, PET ,UPSI, CTET, SUPER TET, UPTET ,TGT ,PGT , TEACHING , Other Exam.
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UPSSSC कैलेंडर जारी

👉जनवरी 2026 से सितम्बर 2026
विज्ञापन संख्या-04-परीक्षा/2026, सहायक बोरिंग तकनीशियन मुख्य परीक्षा (प्रा०अ०प०-2025)/05 के अंतर्गत मुख्य परीक्षा हेतु शार्टलिस्ट अभ्यर्थियों का परिणाम ।
विज्ञापन संख्या-02-परीक्षा/2026, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (संयुक्त संवर्ग) मुख्य परीक्षा (प्रा०अ०प०-2025)/03 के अंतर्गत मुख्य परीक्षा हेतु शुल्क जमा किये जाने के सम्बन्ध में ।
विज्ञापन संख्या-01-परीक्षा/2026, भेषजिक मुख्य परीक्षा (प्रा०अ०प०-2025)/02 के अंतर्गत के अंतर्गत मुख्य परीक्षा हेतु शुल्क जमा किये जाने के सम्बन्ध में ।
UPPSC APS फाइनल रिजल्ट : शॉर्टहैंड में सभी फेल - एक भी चयन नहीं, 331 पद खाली
UP TGT में सम्मिलित हो रहे सभी अभ्यर्थियों को

Best of luck 💐
💐💐❤️❤️❤️👍👍
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📕 कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सप्तांग सिद्धांत

1 _ राजा
2_ अमात्य
3_ जनपद
4_दुर्ग
5_कोष
6_दण्ड
7_मित्र

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📕 नवीं अनुसूची से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य


👉भारतीय संविधान (प्रथम) संशोधन अधिनियम, 1951 के जरिए संविधान में नौवीं अनुसूची तथा अनुच्छेद 31-क और 31-ख जोड़े गए।

👉संसद द्वारा विधि विशेष (यथा- भूमि सुधार विधियां) को नौवीं अनुसूची में रखा जा सकता है, जिन्हें न्यायिक समीक्षा से बचाव दिया जाना आशयित हो।

👉वर्तमान में (मई, 2022 की स्थिति अनुसार) नौवीं अनुसूची में ऐसी 282 विधियां शामिल हैं।

👉अनुच्छेद 31-ख यह कहता है कि नौवीं अनुसूची में उल्लिखित नियमों और विनियमों को इस आधार पर शून्य नहीं
समझा जाएगा कि वे भाग 3 के किन्हीं उपबंधों और प्रदत्त अधिकारों में से किसी से असंगत हैं या उनको छीन लेते हैं या न्यून करते हैं।

👉किंतु वर्ष 2007 में सर्वोच्च न्यायालय ने आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु के मामले में निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद को नौवीं अनुसूची में विधि विशेष को प्रविष्टि करने की शक्ति प्रदान की गई है, किंतु यह न्यायिक संवीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है।
👉न्यायालय ने निर्धारित किया कि 24 अप्रैल, 1973 (केशवानंद भारती वाद निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में शामिल किए गए विधायनों की न्यायिक समीक्षा इस आधार पर की जा सकेगी कि वे अनुच्छेद 21, 14 एवं 19 में प्रतिबिम्बित संविधान के मूल ढांचे की अवधारणा का उल्लंघन करते हैं।

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📕सिंधु घाटी सभ्यता प्रमुख धातु एवं प्राप्ति स्थल

तांबा: खेतड़ी (राजस्थान) एवं बलूचिस्तान

लाजवर्द: बदख्शां (अफगानिस्तान)

फिरोजा, टिन : ईरान

चांदी: राजस्थान की जावर एवं अजमेर खानों से, अफगानिस्तान एवं ईरान

सीसा: अफगानिस्तान और अजमेर

शिलाजीत: हिमालय

गोमेद: गुजरात

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📕 प्रमुख शिक्षा आयोग

👉 मैकाले घोषणा 1835
- भारत में अंग्रेजी शिक्षा की नींव तथा शैक्षिक व्यय के लिए धनराशि आवंटित करना

👉 वुड डिस्पैच 1854  -

प्राथमिक ,माध्यमिक ,स्नातक स्तर के शिक्षा के अंग्रेजी माध्यम के सिफारिश
करना

👉 हंटर कमीशन 1882 -
शिक्षा में विकास का अध्ययन

👉 विश्वविद्यालय आयोग 1902
- (थॉमस रेलै) विश्वविद्यालय का सुधार लागू करना



👉 कोलकाता विश्वविद्यालय आयोग -
1917( माइकल सैंडलर)- विश्वविद्यालय की स्थितियों का अध्ययन करना

👉सार्जेंट योजना 1944

जिसे औपचारिक रूप से भारत में युद्धोत्तर शिक्षा विकास पर सार्जेंट आयोग की रिपोर्ट के रूप में जाना जाता है



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📕 जलियांवाला बाग (13 अप्रैल 1919)

◼️ 13 अप्रैल 1919 को, डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए पंजाब के अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक बड़ी भीड़ शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित हुई। अमृतसर के सैन्य कमांडर कर्नल रेजिनाल्ड डायर ने अपने सैनिकों को गोली चलाने का आदेश दिया। वहाँ नरसंहार हुआ।  इस घटना को जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।

📕परीक्षा बिंदु

◾️ रवींद्रनाथ टैगोर ने  नाइटहुड की उपाधि - को त्याग दिया
◾️ गांधी ने दक्षिण अफ्रीकी सरकार द्वारा उन्हें दिया गया कैसर-ए-हिंद पदक लौटा दिया।
◼️ वायसराय की कार्यकारिणी के भारतीय सदस्य शंकरराम नायर ने कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया
◼️ उधम सिंह ने जिम्मेदार अंग्रेज अधिकारी से बदला लेने के लिए अपना नाम बदलकर मोहम्मद सिंह आजाद रख लिया
◼️ घटना की जांच के लिए भारत सचिव एडमिन मांटेग्यू ने विलियम हंटर की अध्यक्षता में जांच आयोग के गठन किया
◼️ हंटर आयोग में तीन भारतीय सदस्यों को शामिल किया गया अधिवक्ता चिमनलाल हरीलाल शीतलवाड़, पंडित जगत नारायण ,सरदार साहिबजादा सुल्तान अहमद खान थे
◼️ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी एक गैर सरकारी समिति का गठन किया इसमें गांधी जी,मोतीलाल नेहरू ,एम.आर. जयकर, सी.आर.दास अब्बास तैयबजी शामिल थे

📕महत्वपूर्ण तिथि
◼️रॉलेट अधिनियम - फरवरी, 1919
◼️हंटर आयोग - 14 अक्टूबर, 1919
◼️कांग्रेस अधिवेशन - दिसंबर, 1919 (अमृतसर


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👉 उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की आयु सीमा बढ़ाया गया

अध्यक्ष 67 ओर उपाध्यक्ष 65 वर्ष तक सेवा में रह सकते हैं
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📕प्रमुख क्षेत्रीय वर्षा के नाम और उनके विवरण नीचे दिए गए हैं:

​1. आम्र वर्षा (Mango Showers)
​यह वर्षा मुख्य रूप से केरल और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में मानसून से पहले (Pre-monsoon) होती है।

​महत्व: यह वर्षा आम की फसल को जल्दी पकाने में मदद करती है, इसलिए इसे 'आम्र वर्षा' कहा जाता है।

​2. फूलों वाली बौछार (Blossom Showers)

​यह भी मानसून पूर्व वर्षा का एक प्रकार है जो मुख्य रूप से केरल और उसके आसपास के क्षेत्रों में होती है।
​महत्व: यह कॉफी के फूलों के खिलने के लिए अत्यंत लाभदायक होती है, इसीलिए इसे 'चेरी ब्लॉसम' या फूलों वाली बौछार कहते हैं।



​3. काल बैसाखी (Kaal Baisakhi)

​यह पश्चिम बंगाल और असम में वैशाख के महीने में होने वाली तीव्र कड़क और गरज के साथ वर्षा है।

​प्रकृति: यह वर्षा अक्सर विनाशकारी तूफानों के साथ आती है, लेकिन चाय, जूट और चावल की खेती के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है।

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असम में नाम: असम में इसे 'बारदोली छीड़ा' (Bordoisila) के नाम से जाना जाता है।

​4. लू (Loo) और धूल भरी आँधी


​उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, और राजस्थान) में गर्मियों में चलने वाली गर्म और शुष्क हवाओं के बाद कभी-कभी हल्की वर्षा होती है। इसे स्थानीय स्तर पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

नोट:
'मावट' वह वर्षा है जो सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण उत्तर भारत में होती है, जो रबी की फसलों के लिए 'सुनहरी बूंदों' की तरह काम करती है।

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