📕कुछ महत्वपूर्ण अनुच्छेद
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👉अनुच्छेद 107 - विधेयकों को पेश करने और पारित करने के संबंध में प्रावधान।
👉अनुच्छेद 108 - कुछ मामलों में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।
👉अनुच्छेद 109 - धन विधेयक के संबंध में विशेष प्रक्रिया.
👉अनुच्छेद 110 - "धन विधेयक" की परिभाषा।
👉अनुच्छेद 111 - विधेयकों पर सहमति।
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📕संविधान सभा
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👉1895 ई. संविधान सभा की संकल्पना सर्वप्रथम 1895 में बाल गंगाधर तिलक द्वारा प्रस्तुत स्वराज विधेयक में की गई, लेकिन
👉विधेयक में स्पष्ट रूप से संविधान सभा शब्द का उल्लेख नहीं था।
👉1922 ई. - स्वराज शब्द को स्पष्ट करते समय गांधी जी ने संविधान सभा का विचार दिना था।
👉1928 ई. नेहरु समिति ने पहली बार संविधान का प्रारूप दिया था।
👉1934 ई. - MN राय ने संविधान सभा की मांग की। (व्यक्तिगत रूप में)
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📕 परीक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण
👉 निंदा प्रस्ताव
📕 विश्वास प्रस्ताव
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👉 निंदा प्रस्ताव
◼️ लोकसभा में इसे स्वीकारने का कारण बताना अनिवार्य है📕 अविश्वास प्रस्ताव
◼️ यह किसी एक मंत्री या मंत्रियों के समूह है या पूरे मंत्रिपरिषद के विरुद्ध लाया जा सकता है
◼️ यह मंत्री परिषद की कुछ नीतियों या कार्य के खिलाफ निंदा के लिए लाया जाता है
◼️ यदि यह लोकसभा में पारित हो जाए तो मंत्री परिषद को त्यागपत्र देना आवश्यक नहीं है
◼️ लोकसभा में इसे स्वीकार करने का कारण बताना आवश्यक नहीं है
◼️ यह सिर्फ पूरे मंत्री परिषद के विरुद्ध ही लाया जा सकता है
◼️ यह मंत्री परिषद में लोकसभा के विश्वास के निर्धारण हेतु लाया जाता है
◼️ यदि लोकसभा में पारित हो जाए तो मंत्री परिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है
◼️ इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 सदस्यों की सहमति अनिवार्य है
📕 विश्वास प्रस्ताव
◼️ त्रिशंकु दल,अल्पमत सरकार या गठबंधन सरकार आदि परिस्थितियों से निपटने के लिए इस विश्वास प्रस्ताव का प्रावधान किया गया है
◼️ इसे सरकार को सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित किया जाता है
◼️ यदि विश्वास प्रस्ताव गिर जाता है तब सरकार भी गिर जाती है
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📕 नवीं अनुसूची से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
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👉भारतीय संविधान (प्रथम) संशोधन अधिनियम, 1951 के जरिए संविधान में नौवीं अनुसूची तथा अनुच्छेद 31-क और 31-ख जोड़े गए।
👉संसद द्वारा विधि विशेष (यथा- भूमि सुधार विधियां) को नौवीं अनुसूची में रखा जा सकता है, जिन्हें न्यायिक समीक्षा से बचाव दिया जाना आशयित हो।
👉वर्तमान में (मई, 2022 की स्थिति अनुसार) नौवीं अनुसूची में ऐसी 282 विधियां शामिल हैं।
👉अनुच्छेद 31-ख यह कहता है कि नौवीं अनुसूची में उल्लिखित नियमों और विनियमों को इस आधार पर शून्य नहीं
समझा जाएगा कि वे भाग 3 के किन्हीं उपबंधों और प्रदत्त अधिकारों में से किसी से असंगत हैं या उनको छीन लेते हैं या न्यून करते हैं।
👉किंतु वर्ष 2007 में सर्वोच्च न्यायालय ने आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु के मामले में निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद को नौवीं अनुसूची में विधि विशेष को प्रविष्टि करने की शक्ति प्रदान की गई है, किंतु यह न्यायिक संवीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है।
👉न्यायालय ने निर्धारित किया कि 24 अप्रैल, 1973 (केशवानंद भारती वाद निर्णय की तिथि) के बाद नौवीं अनुसूची में शामिल किए गए विधायनों की न्यायिक समीक्षा इस आधार पर की जा सकेगी कि वे अनुच्छेद 21, 14 एवं 19 में प्रतिबिम्बित संविधान के मूल ढांचे की अवधारणा का उल्लंघन करते हैं।
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📕राज्य का राज्यपाल , विवेकानुसार कार्य 👉
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1. विधानसभा में सरकार को अपना बहुमत सिद्ध करने को कहने के लिए।
2. अल्पमत में आए मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने के लिए।
3. किसी विधेयक पर अनुमति देने, अनुमति रोकने अथवा भारत के राष्ट्रपति के विचारार्थ उस विधेयक को आरक्षित करने के लिए (अनु. 200)।
4. विधायिका द्वारा पारित किसी विधेयक को पुनर्विचार हेतु वापस करने के लिए (अनु. 200 का परंतुक)।
👉इनके अतिरिक्त राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने तथा विधानसभा के समय पूर्व विघटन जैसे कुछ अन्य संदर्भों में भी वह अपने विवेक का प्रयोग कर सकता है
👉उसे उच्च न्यायालय से परामर्श मांगने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।
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📚 केंद्र- राज्य संबंध से संबंधित अनुच्छेद
📚केंद्र राज्यों का संबंध संविधान के भाग 11(अनुच्छेद 245-263) में दिया गया है
📚अनुच्छेद 245
📚अनुच्छेद 246
📚अनुच्छेद 247
📚अनुच्छेद 248
📚 अनुच्छेद 253
📚अनुच्छेद 254
📚अनुच्छेद 263
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📚केंद्र राज्यों का संबंध संविधान के भाग 11(अनुच्छेद 245-263) में दिया गया है
📚अनुच्छेद 245
संसद देश में कानून बना सकती है।
विधानमंडल राज्य में कानूjbन बना सकती है।
📚अनुच्छेद 246
संघ सूची ,राज्य सूची व समवर्ती सूची के विषयों का उल्लेख।
📚अनुच्छेद 247
अतिरिक्त न्यायालय बनाया जा सकता है।
📚अनुच्छेद 248
अवशिष्ट सूची।📚अनुच्छेद 252
जो विषय बाद में जुड़े जाएंगे वह केंद्र सरकार के विषय में जोड़े जाएंगे। ex-इसरो, डीआरडीओ, साइबर क्राइम आदि।
दो या दो से अधिक राज्यों की सहमति हो तो संसद राज्य सूची में भी कानून बना सकती है।
📚 अनुच्छेद 253
अंतर्राष्ट्रीय करार या समझौते को प्रभावी बनाने के लिए संसद राज्य सूची में भी कानून बना सकती है।
📚अनुच्छेद 254
विधानमंडल ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगी जो संसद के कानून से असंगत हो या मेल ना खाता हो।
📚अनुच्छेद 263
अन्तर्राजीय परिषद का उल्लेख।
सभी राज्य और यूटी के मुख्यमंत्री की केंद्र सरकार द्वारा वर्ष में तीन बार मीटिंग
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वर्तमान में शीर्ष पदों का वरीयता अनुक्रम इस प्रकार है-
👉1. राष्ट्रपति,#uppcs #pcs #uppcspre2025 #mppsc #ukpcs #bpsc ,#uppcs #upsssc #pet2025 #LT #gs #gk
👉2. उपराष्ट्रपति,
👉3. प्रधानमंत्री,
👉4. राज्यों के राज्यपाल (अपने राज्य में),
👉5. भूतपूर्व राष्ट्रपति,
👉5क. उपप्रधानमंत्री,
👉6. भारत के मुख्य न्यायाधीश,लोक सभा अध्यक्ष,
👉7. केंद्र के कैबिनेट मंत्री, राज्य सभा एवं लोक सभामें विपक्ष के नेता, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, भूतपूर्व प्रधानमंत्री, राज्यों केमुख्यमंत्री (अपने राज्य में),
👉7क. भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति,
👉8. भारतस्थित विदेशों के असाधारण तथा पूर्णाधिकारी राजदूत तथा राष्ट्रमंडलदेशों के उच्चायुक्त, राज्यों के राज्यपाल (अपने राज्य के बाहर), राज्योंके मुख्यमंत्री (अपने राज्य के बाहर),
👉 9. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश,
👉9क. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक,मुख्य निर्वाचन आयुक्त,
👉 10. राज्य सभा के उपसभापति, लोक सभा का.उपाध्यक्ष, नीति आयोग के सदस्य, राज्यों के उपमुख्यमंत्री, केंद्र केराज्य मंत्री (और रक्षा मंत्रालय में रक्षा मामलों के लिए कोई अन्यमंत्री),
👉11. भारत के महान्यायवादी, कैबिनेट सचिव, उपराज्यपाल (अपनेसंघ शासित क्षेत्र में),
👉12. जनरल अथवा उनके समान रैंक वाले सेनाध्यक्ष ।
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🔰 प्रमुख समितियां
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👉संघीय संविधान समिति - पं. जवाहरलाल नेहरू
👉प्रक्रिया विषयक नियमों संबंधी समिति - डॉ. राजेंद्र प्रसाद
👉संचालन (Steering) समिति - डॉ. राजेंद्र प्रसाद
👉प्रारूप समिति - डॉ. भीम राव अम्बेडकर
👉मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों एवं जनजातीय और अपवर्जित क्षेत्रों संबंधी सलाहकार समिति - सरदार वल्लभभाई पटेल
👉मूल अधिकार उपसमिति - जे. बी. कृपलानी
👉 अल्पसंख्यक उपसमिति - एच.सी. मुखर्जी
👉संघीय शक्तियों संबंधी समिति - पं. जवाहरलाल नेहरू
👉 प्रांतीय संविधान समिति - सरदार वल्लभभाई पटेल
👉 कार्य संचालन संबंधी समिति - के. एम. मुंशी
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📕राज्यपाल से संबंधित प्रमुख प्रावधान
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🔰अनुच्छेद154 के अनुसार, राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती
👉अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होताहै, लेकिन सातवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 से एक ही व्यक्तिको दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है।
👉 संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारतके राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
👉सामान्यतया, राज्यपाल का कार्यकालपदग्रहण से पांच वर्ष की अवधि के लिए होता है।
👉अनुच्छेद 156(1)के तहत राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपना पद धारण करताहै।
👉अनुच्छेद 156(2) के तहत राज्यपाल, राष्ट्रपति को संबोधित अपनेहस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग कर सकता है।
🔰अनुच्छेद157 के अनुसार, राज्यपाल पद के लिए अर्हताएं हैं-
(1) वह भारत कानागरिक हो
(2) वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
👉अनुच्छेद166 के तहत, राज्य सरकार के सभी कार्यकारी कार्य औपचारिक रूपसे राज्यपाल के नाम पर होते हैं।
👉 अनुच्छेद 202(3) (क) के अनुसार,राज्यपाल की उपलब्धियां, भत्ते तथा उसके पद से संबंधित अन्य व्ययराज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
👉 संविधान के अनुच्छेद 164(1)के अनुसार, मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाएगी तथा अन्यमंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा
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