रेवेन - एकमात्र पक्षी जो एक बाज को चोंच मारने की हिम्मत करता है । यह बाज की पीठ पर बैठता है और उसकी गर्दन पर अपनी चोंच से काटता है।
बाज रेवेन के साथ लड़ने में समय ओर ऊर्जा बर्बाद नहीं करता है। बाज सिर्फ अपने पंख खोलता है और आसमान में ऊँची उड़ान भरने लगता है। उड़ान जितनी ऊँची होती जाती है, रेवेन को सांस लेने के लिए उतनी ही कठिनाई होती है और अंत में ऑक्सीजन की कमी के कारण रैवेन गिर जाता है।
इसीलिए कभी-कभी सभी लड़ाइयों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं होती है। लोगों के तर्कों या उनकी आलोचनाओं के जवाब देने की कोई आवश्यकता नहीं है, बस अपना कद बढ़ाए, वे स्वतः ही गिर जाएंगे...✍️
शुभ रात्रि 🙏
बाज रेवेन के साथ लड़ने में समय ओर ऊर्जा बर्बाद नहीं करता है। बाज सिर्फ अपने पंख खोलता है और आसमान में ऊँची उड़ान भरने लगता है। उड़ान जितनी ऊँची होती जाती है, रेवेन को सांस लेने के लिए उतनी ही कठिनाई होती है और अंत में ऑक्सीजन की कमी के कारण रैवेन गिर जाता है।
इसीलिए कभी-कभी सभी लड़ाइयों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं होती है। लोगों के तर्कों या उनकी आलोचनाओं के जवाब देने की कोई आवश्यकता नहीं है, बस अपना कद बढ़ाए, वे स्वतः ही गिर जाएंगे...✍️
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इंसान द्वारा इंसान को खींचना अमानवीय: सुप्रीम कोर्ट लगाया प्रतिबंध
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के माथेरान में हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शा पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने इसे अमानवीय और गरिमा के खिलाफ बताया है।
▪️सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान को खींचना अमानवीय है, खासकर आज़ादी के 78 साल और संविधान के 75 साल बाद।
▪️कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 6 महीने के भीतर हाथ रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने और ई-रिक्शा को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं।
▪️कोर्ट ने यह भी कहा कि यह प्रथा सामाजिक और आर्थिक न्याय के संवैधानिक आदर्शों के खिलाफ है।
▪️यह फैसला महाराष्ट्र के माथेरान में चल रही ई-रिक्शा पायलट परियोजना से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई के दौरान आया है।
▪️सुप्रीम कोर्ट ने 1980 के एक ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें रिक्शा चालकों को गरिमापूर्ण जीवन देने के निर्देश दिए गए थे.
▪️कोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा एक मानवीय विकल्प हो सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि धन की कमी को इस प्रथा को जारी रखने का बहाना नहीं बनाया जा सकता.
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– सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 6 अगस्त 2025 को आया।
हिल स्टेशन ‘माथेरान’ के बारे में
– किस राज्य में : महाराष्ट्र
– किस जिले में : रायगढ़
– समुद्रतल से ऊचाई : 800 मीटर (2600 फीट)
– यह भारत के सबसे छोटे हिल स्टेशनों में से एक है। यह मुंबई से लगभग 90 किमी और पुणे से 120 किमी दूर है।
– माथेरान का मराठी में अर्थ है “पहाड़ों के माथे पर जंगल”।
– पर्यावरण संवेदनशीलता : यह भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा घोषित एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र है।
– खासियत : आंशिक रूप से ऑटोमोबाइल मुक्त हिल स्टेशन है।
माथेरान में अब तक क्यों चल रहा था हाथ रिक्शा?
– दरअसल, माथेरान के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र होने के चलते वहां पेट्रोल-डीजल वाहन चलाने पर रोक है।
– ऐसे में वहां पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए हाथ रिक्शा यातायात का साधन है। इसके अलावा 400 से ज्यादा घोड़े भी हैं, जो पर्यटकों की मदद के लिए इस्तेमाल होते हैं।
– सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के मद्देनजर वहां कुछ ई-रिक्शा उपलब्ध करवाए गए हैं।
– फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 6 महीने में ई-रिक्शा नीति बनाने के लिए कहा था।
– अगस्त 2025 में कोर्ट ने हाथ रिक्शा पर तत्काल रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
– अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा, “आजादी के 78 साल, संविधान के 75 साल और इस ऐतिहासिक फैसले के 45 साल बाद भी हाथ रिक्शा जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है”।
– चीफ जसिटस बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा “कोई भी व्यक्ति दूसरे को अपनी इच्छा से नहीं खींचता है। वह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि उसके पास जीवनयापन का कोई और साधन नहीं है, लेकिन इस तरह का चलन मानव गरिमा के विरुद्ध है। इसे जारी रखना सामाजिक और आर्थिक न्याय के संवैधानिक वायदे को नीचा दिखाने वाली बात होगी”।
1980 के एक फैसले का किया जिक्र
– कोर्ट ने अपने आदेश में 1980 के ऐतिहासिक ‘आजाद रिक्शा पुलर्स एसोसिएशन बनाम पंजाब’ फैसले का उल्लेख किया है।
– उस फैसले में रिक्शा वालों को गरिमापूर्ण जीवन देने के लिए कई निर्देश दिए गए थे।
– चीफ जस्टिस ने कहा, “आजादी के 78 साल, संविधान के 75 साल और इस ऐतिहासिक फैसले के 45 साल बाद भी हाथ रिक्शा जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है”।
जापान से शुरू हुए हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे
– हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे की उत्पत्ति 1869 में जापान में हुई थी, जहां तीन उद्यमियों, सुजुकी टोकुजिरो, इज़ुमी योसुके और ताकायामा कोसुके ने इसका आविष्कार किया था।
– यह विचार जल्द ही अन्य एशियाई देशों, जैसे चीन और भारत में भी फैल गया, जहां रिक्शे परिवहन का एक लोकप्रिय साधन बन गए।
– भारत में, हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे 19वीं सदी के अंत में ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला में दिखाई दिए
– 20वीं शताब्दी के दौरान, हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शों को साइकिल रिक्शा, ऑटो रिक्शा और अंततः इलेक्ट्रिक रिक्शा जैसे अधिक आधुनिक परिवहन साधनों द्वारा रिप्लेस किया गया।
कोलकाता में भी थी प्रथा
– हाथ रिक्शा, सवा सौ साल से भी लंबे अरसे से कोलकाता की पहचान का हिस्सा रहे हैं। एक दशक पहले इस पर प्रतिबंध लग चुका है।
– कोलकाता में इन रिक्शों की शुरुआत 19वीं सदी के आखिरी दिनों में चीनी व्यापारियों ने की थी तब इसका मक़सद सामान की ढुलाई था।
– आज़ादी के पहले और उसके ठीक बाद इसे शान की सवारी और स्टेट्स सिंबल माना जाता था।
– उस दौर में धनी लोग तो पालकी से चलते थे।
– लेकिन मध्य वर्ग और उच्च मध्य वर्ग के लिए ये हाथ रिक्शा ही आवाजाही का प्रमुख साधन थे।
– 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान सीमा पार से आने वाले शरणार्थियों के लिए ये रिक्शा ही रोज़गार का सबसे बड़ा साधन था।
– इसे अमानवीय करार देते हुए राज्य सरकार इसपर पर पाबंदी लगा चुकी है।
हिल स्टेशन ‘माथेरान’ के बारे में
– किस राज्य में : महाराष्ट्र
– किस जिले में : रायगढ़
– समुद्रतल से ऊचाई : 800 मीटर (2600 फीट)
– यह भारत के सबसे छोटे हिल स्टेशनों में से एक है। यह मुंबई से लगभग 90 किमी और पुणे से 120 किमी दूर है।
– माथेरान का मराठी में अर्थ है “पहाड़ों के माथे पर जंगल”।
– पर्यावरण संवेदनशीलता : यह भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा घोषित एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र है।
– खासियत : आंशिक रूप से ऑटोमोबाइल मुक्त हिल स्टेशन है।
माथेरान में अब तक क्यों चल रहा था हाथ रिक्शा?
– दरअसल, माथेरान के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र होने के चलते वहां पेट्रोल-डीजल वाहन चलाने पर रोक है।
– ऐसे में वहां पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए हाथ रिक्शा यातायात का साधन है। इसके अलावा 400 से ज्यादा घोड़े भी हैं, जो पर्यटकों की मदद के लिए इस्तेमाल होते हैं।
– सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के मद्देनजर वहां कुछ ई-रिक्शा उपलब्ध करवाए गए हैं।
– फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 6 महीने में ई-रिक्शा नीति बनाने के लिए कहा था।
– अगस्त 2025 में कोर्ट ने हाथ रिक्शा पर तत्काल रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
– अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा, “आजादी के 78 साल, संविधान के 75 साल और इस ऐतिहासिक फैसले के 45 साल बाद भी हाथ रिक्शा जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है”।
– चीफ जसिटस बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा “कोई भी व्यक्ति दूसरे को अपनी इच्छा से नहीं खींचता है। वह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि उसके पास जीवनयापन का कोई और साधन नहीं है, लेकिन इस तरह का चलन मानव गरिमा के विरुद्ध है। इसे जारी रखना सामाजिक और आर्थिक न्याय के संवैधानिक वायदे को नीचा दिखाने वाली बात होगी”।
1980 के एक फैसले का किया जिक्र
– कोर्ट ने अपने आदेश में 1980 के ऐतिहासिक ‘आजाद रिक्शा पुलर्स एसोसिएशन बनाम पंजाब’ फैसले का उल्लेख किया है।
– उस फैसले में रिक्शा वालों को गरिमापूर्ण जीवन देने के लिए कई निर्देश दिए गए थे।
– चीफ जस्टिस ने कहा, “आजादी के 78 साल, संविधान के 75 साल और इस ऐतिहासिक फैसले के 45 साल बाद भी हाथ रिक्शा जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है”।
जापान से शुरू हुए हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे
– हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे की उत्पत्ति 1869 में जापान में हुई थी, जहां तीन उद्यमियों, सुजुकी टोकुजिरो, इज़ुमी योसुके और ताकायामा कोसुके ने इसका आविष्कार किया था।
– यह विचार जल्द ही अन्य एशियाई देशों, जैसे चीन और भारत में भी फैल गया, जहां रिक्शे परिवहन का एक लोकप्रिय साधन बन गए।
– भारत में, हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे 19वीं सदी के अंत में ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला में दिखाई दिए
– 20वीं शताब्दी के दौरान, हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शों को साइकिल रिक्शा, ऑटो रिक्शा और अंततः इलेक्ट्रिक रिक्शा जैसे अधिक आधुनिक परिवहन साधनों द्वारा रिप्लेस किया गया।
कोलकाता में भी थी प्रथा
– हाथ रिक्शा, सवा सौ साल से भी लंबे अरसे से कोलकाता की पहचान का हिस्सा रहे हैं। एक दशक पहले इस पर प्रतिबंध लग चुका है।
– कोलकाता में इन रिक्शों की शुरुआत 19वीं सदी के आखिरी दिनों में चीनी व्यापारियों ने की थी तब इसका मक़सद सामान की ढुलाई था।
– आज़ादी के पहले और उसके ठीक बाद इसे शान की सवारी और स्टेट्स सिंबल माना जाता था।
– उस दौर में धनी लोग तो पालकी से चलते थे।
– लेकिन मध्य वर्ग और उच्च मध्य वर्ग के लिए ये हाथ रिक्शा ही आवाजाही का प्रमुख साधन थे।
– 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान सीमा पार से आने वाले शरणार्थियों के लिए ये रिक्शा ही रोज़गार का सबसे बड़ा साधन था।
– इसे अमानवीय करार देते हुए राज्य सरकार इसपर पर पाबंदी लगा चुकी है।
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जिस किसी को मेरठ के CCS Univerity से LL.B. 3yr करनी है । उसके लिए अंतिम अवसर
यूनिवर्सिटी ने एलएलबी पाठ्यक्रमों के पंजीकरण की तिथि 18 अगस्त तक बढ़ा दी है। स्नातक पाठ्यक्रमों में पहली मेरिट सूची के प्रवेश की अंतिम तिथि भी 14 अगस्त तक बढ़ाई गई है। यह फैसला समर्थ पोर्टल में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण लिया गया है।
यूनिवर्सिटी ने एलएलबी पाठ्यक्रमों के पंजीकरण की तिथि 18 अगस्त तक बढ़ा दी है। स्नातक पाठ्यक्रमों में पहली मेरिट सूची के प्रवेश की अंतिम तिथि भी 14 अगस्त तक बढ़ाई गई है। यह फैसला समर्थ पोर्टल में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण लिया गया है।
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अधिवक्ता पंजीकरण (एडवोकेट एनरोलमेंट) के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला बरकरार - राज्य बार नहीं वसूल सकते वैकल्पिक या अतिरिक्त फीस
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि इंडिया बार काउंसिल (BCI) या राज्य बार काउंसिल एनरोलमेंट के लिए लीगल फीस के अतिरिक्त "वैकल्पिक शुल्क" के रूप में कोई फीस नहीं ले सकतीं।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने कहा,
"हम स्पष्ट करते हैं कि वैकल्पिक जैसा कुछ नहीं है। कोई भी राज्य बार काउंसिल या भारतीय बार काउंसिल वैकल्पिक रूप से किसी भी राशि का कोई भी शुल्क नहीं लेगी। उन्हें इस न्यायालय द्वारा मुख्य निर्णय में जारी निर्देशों के अनुसार ही शुल्क लेना होगा।"
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि बार काउंसिल 2024 के फैसले की अवमानना कर रही हैं, क्योंकि वे जारी किए गए निर्देशों का पालन करने में विफल रही हैं, खासकर कर्नाटक राज्य बार काउंसिल, जो वैधानिक फीस के अलावा क्रमशः 6800 रुपये और 25,000 रुपये वसूल रही है।
न्यायालय ने गौरव कुमार बनाम भारत संघ (2024) के अपने निर्णय की पुष्टि की कि बार काउंसिल एडवोकेट एक्ट, 1961 की धारा 24 के तहत निर्धारित एनरोलमेंट फीस से अधिक फीस नहीं ले सकतीं। इसलिए न्यायालय ने कहा कि धारा 24 के अनुसार, सामान्य श्रेणी के वकीलों के लिए एनरोलमेंट फीस 750 रुपये और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के वकीलों के लिए 125 रुपये है ।
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2025 में खाद्य और शांति के लिए एम.एस. स्वामीनाथन पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता कौन थे?
Anonymous Quiz
23%
डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन
28%
डॉ. वंदना शिवा
40%
नाइजीरिया के प्रोफेसर एडेनले
9%
प्रोफेसर युआन लोंगपिंग
एशिया की सबसे लंबी मालगाड़ी, 4.5 किमी लंबी, का क्या नाम है, जिसका परीक्षण अगस्त 2025 में पूरा हो गया?
Anonymous Quiz
6%
वज्र
51%
रुद्रस्त्र
28%
गरुड़
14%
अग्निवेग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अगस्त, 2025 को कॉमन सेंट्रल सचिवालय भवन के एक हिस्से का उद्घाटन किया, इसका क्या नाम है?
Anonymous Quiz
6%
कार्य भवन-3
34%
राष्ट्र भवन-2
54%
कर्तव्य भवन-3
6%
पथ भवन
सुप्रीम कोर्ट ने किस हिल स्टेशन में ‘हाथ रिक्शा’ पर बैन लगाया?
Anonymous Quiz
15%
मसूरी
54%
माथेरान
24%
गंगटोक
8%
श्री शैलम
सुप्रीम कोर्ट ने किस राज्य के हिल स्टेशन ‘माथेरान’ में ‘हाथ रिक्शा’ को अमानवीय प्रथा बताकर इसे बंद करने और इसकी जगह ई-रिक्शा चलाने का आदेश दिया?
Anonymous Quiz
3%
बिहार
48%
महाराष्ट्र
45%
पश्चिम बंगाल
3%
उत्तर प्रदेश
बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025, एक अगस्त से लागू हो गया, इसके जरिए किन कानूनों में संशोधन किए गए हैं?
Anonymous Quiz
9%
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934,
40%
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 और भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955
13%
बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 और 1980
38%
उपरोक्त सभी
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन 5 अगस्त 2025 को हो गया, वह किन राज्यों के राज्यपाल रह चुके थे?
Anonymous Quiz
30%
जम्मू-कश्मीर, मेघालय
26%
गोवा, ओडिशा, बिहार
8%
यूपी, एमपी, केरल
36%
a और b दोनों
किस राज्य सरकार ने बैलगाड़ी दौड़, कबूतरबाज़ी जैसे पारंपरिक विरासती खेलों पर लंबे समय से लगे प्रतिबंध को हटा दिया?
Anonymous Quiz
35%
हरियाणा
33%
पंजाब
22%
उत्तर प्रदेश
10%
मध्य प्रदेश
शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को हो गया है, वह किस राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके थे?
Anonymous Quiz
72%
झारखंड
14%
बिहार
8%
उत्तर प्रदेश
5%
छत्तीसगढ़
मानसून सत्र में अभी तक पारित होने वाले बिल
▪️भारतीय पत्तन बिल, 2025
▪️राष्ट्रीय एंटी डोपिंग (संशोधन) बिल, 2025
▪️राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025
▪️मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) बिल, 2025
▪️कराधान कानून (संशोधन) बिल, 2025
▪️खान और खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) संशोधन बिल 2025
▪️आय-कर (संख्या 2) बिल, 2025
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𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
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Haryana ADA Prelims Exam Date Announced by Exam Calender
2 नवंबर 2025 को आयोजित होगी परीक्षा।
2 नवंबर 2025 को आयोजित होगी परीक्षा।
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उत्तराखंड सिविल जज भर्ती, 2025 का Admit Card जारी । 31 अगस्त 2025 को होनी है परीक्षा 👉 Admit Card Link
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◼️ साइबर धोखाघड़ी रोकने के लिए बंद हो सकती है पल भुगतान सुविधा
◼️ UPI के जरिये लिंक भेजकर भुगतान मांगने पर रोक लगाने की तैयारी
◼️ ₹2000 की सीमा तय है वर्ष 2019 से इस पूर्व भुगतान सुविधा के अंतर्गत
◼️ साइबर ठग यूपीआई पुल भुगतान प्रक्रिया के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं
◼️ वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में आरबीआई के लोकपाल को 27000 से अधिक शिकायत मिली है
◼️ UPI के जरिये लिंक भेजकर भुगतान मांगने पर रोक लगाने की तैयारी
◼️ ₹2000 की सीमा तय है वर्ष 2019 से इस पूर्व भुगतान सुविधा के अंतर्गत
◼️ साइबर ठग यूपीआई पुल भुगतान प्रक्रिया के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं
◼️ वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में आरबीआई के लोकपाल को 27000 से अधिक शिकायत मिली है