पुराण प्रवचन
बेटा जब बुद्धघोष भी उसी समय के है जब चीनी आगम और उसके अनुवाद आदि होना शुरू हुआ था तो इस बात का प्रमाण क्या है कि जो बुद्धघोष ने जो सूत्त को उद्धृत किया उसी चीनी आगम के अनुवाद के समकालीन वो 1 st century BCE के पहले नहीं होगी। प्रमाण क्या है इसका? क्यों कि…
सबसे बड़ी बात की ये सब बस उसका ओपिनियन है प्रमाण कुछ भी नहीं है प्रमाण लेके आ ठोस कोई
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अब अगर इसके स्कॉलर के बात माने की जो प्राचीन पाली पाठ और चीनी आगम अनुवाद दोनों पाठों में मौजूद होगा वो पहली बौद्ध संगति के पहले का है।
तो मैथुनधम्म का भी हमे पाली पाठ में , चीनी आगम के अनुवाद पाठ में तथा इसका तो संस्कृत में भी पाठ मिलता है। इतना ही नहीं लगभग 60 parallels in Ancient text इसका मिलता है।
बता दें मैथुनधम्म में ही बुद्ध बताता है कि -
तो फिर मैथुनधम्म सुत्त भी प्रामाणिक सिद्ध हुआ इसके लिए 😂😂
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तो मैथुनधम्म का भी हमे पाली पाठ में , चीनी आगम के अनुवाद पाठ में तथा इसका तो संस्कृत में भी पाठ मिलता है। इतना ही नहीं लगभग 60 parallels in Ancient text इसका मिलता है।
बता दें मैथुनधम्म में ही बुद्ध बताता है कि -
अगर कोई भिक्षु किसी छोटी बच्ची का बलात्कार कर उसको मार दे तो वो संघ से निष्कासन के लिए कोई बड़ी अपराध नहीं है उसे बस कुछ दिन के लिए निलंबन किया जा सकता है।
तो फिर मैथुनधम्म सुत्त भी प्रामाणिक सिद्ध हुआ इसके लिए 😂😂
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क्या कान्हासप्प सूत्त (AN 5/229-230) का प्राचीन पाठ नहीं मिलता ?
अंगुत्तरनिकाय (५/२२९-२३०) जिसको "कान्हासप्प सूत्त" भी कहा जाता है और "प्रथम कान्हासप्प सूत्त" और "द्वितीय कान्हासप्प सूत्त" में विभक्त है।
इसका प्राचीन उल्लेख हमे 4-5 वी शताब्दी के बौद्धाचार्य बुद्धघोष के भाष्य तक में मिल जाता है जिसमें -
अब कुछ गधे कहेंगे कि चीनी आगम के अनुवाद में नहीं है 🤣 तो बेटा श्रीलंका के परंपरा जो भारत से ही श्रीलंका में गया वही से ही चीन में त्रिपिटक पहुंचा था इसलिए ज्यादा प्रमाणिक तो श्रीलंका के पाठ ही है।
दूसरी बात जिस 4-5 सदी ईस्वी में तेरा चीनी आगम के अनुवाद हो रहा था उसी के समकालीन तो बुद्धघोष के टिका भी है। तो समकालीन होने पर इसका कोई ठोस आधार नहीं की यह सुत्त 1st BCE के पहले नहीं था।
क्यों कि जिस समय का तेरा चीनी अनुवाद है उसी समय काल का बुद्धघोष भी है 🤣
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अंगुत्तरनिकाय (५/२२९-२३०) जिसको "कान्हासप्प सूत्त" भी कहा जाता है और "प्रथम कान्हासप्प सूत्त" और "द्वितीय कान्हासप्प सूत्त" में विभक्त है।
इसका प्राचीन उल्लेख हमे 4-5 वी शताब्दी के बौद्धाचार्य बुद्धघोष के भाष्य तक में मिल जाता है जिसमें -
स्त्रियों की तुलना काला सांप के साथ बुद्ध करते हैं।
अब कुछ गधे कहेंगे कि चीनी आगम के अनुवाद में नहीं है 🤣 तो बेटा श्रीलंका के परंपरा जो भारत से ही श्रीलंका में गया वही से ही चीन में त्रिपिटक पहुंचा था इसलिए ज्यादा प्रमाणिक तो श्रीलंका के पाठ ही है।
दूसरी बात जिस 4-5 सदी ईस्वी में तेरा चीनी आगम के अनुवाद हो रहा था उसी के समकालीन तो बुद्धघोष के टिका भी है। तो समकालीन होने पर इसका कोई ठोस आधार नहीं की यह सुत्त 1st BCE के पहले नहीं था।
क्यों कि जिस समय का तेरा चीनी अनुवाद है उसी समय काल का बुद्धघोष भी है 🤣
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क्या प्राचीन चीनी आगम अनुवाद के पाठ में स्त्री का बुद्ध होने का अधिकार है?
हमने जब मझीम निकाय (११५ बहुधातुक सूत्त) में देखा तो वहां हमे कई सारे प्राचीन चीनी आगम के अनुवाद मिले
जिसमें चीनी आगम अनुवाद पाठ में लिखा था कि-
अब बुद्धघोष जी के भाष्य तो चीनी आगम के अनुवाद से भी सिद्ध हो गया रे 😭😭
क्या करेगा अब मेरे मुतिया 😭😭
चीनी वाले भी तुझे पेल दिए हैं अपने आगम अनुवाद में 😭😭
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हमने जब मझीम निकाय (११५ बहुधातुक सूत्त) में देखा तो वहां हमे कई सारे प्राचीन चीनी आगम के अनुवाद मिले
जिसमें चीनी आगम अनुवाद पाठ में लिखा था कि-
स्त्री न तो शासीका बन सकती है और न ही बुद्ध बन सकती है 😭😭
अब बुद्धघोष जी के भाष्य तो चीनी आगम के अनुवाद से भी सिद्ध हो गया रे 😭😭
क्या करेगा अब मेरे मुतिया 😭😭
चीनी वाले भी तुझे पेल दिए हैं अपने आगम अनुवाद में 😭😭
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पुराण प्रवचन
क्या कान्हासप्प सूत्त (AN 5/229-230) का प्राचीन पाठ नहीं मिलता ? अंगुत्तरनिकाय (५/२२९-२३०) जिसको "कान्हासप्प सूत्त" भी कहा जाता है और "प्रथम कान्हासप्प सूत्त" और "द्वितीय कान्हासप्प सूत्त" में विभक्त है। इसका प्राचीन उल्लेख हमे 4-5 वी शताब्दी के बौद्धाचार्य…
देखो हमारा बहुत सीधा और सरल तर्क है तुम्हारा कहना है कि ये अमुक सूत के समानांतर हमे नहीं मिलते चीनी अनुवाद में क्या इससे कुछ भी सिद्ध होता है ??
नहीं बिलकुल नहीं क्योंकि उसी समय में हमें यह चीज श्रीलंका में अवश्य प्राप्त होती है जिससे यह सिद्ध होता है कि यह उस समय में था सबसे बड़ी बात की चीनी यात्री यहां से ग्रन्थ लेकर गए फिर अनुवाद किया अब इसमें उन्होंने क्या सूट खोया क्या पाया कोई नहीं जान सकता पर श्रीलंका प्राचीनतम काल से ही सूत संग्रह करके रखा है इसलिए भी उसकी प्रमाणिकता है अब अगर तुम्हारे पास कोई अतिरिक्त प्रमाण नहीं है इनको बाद का सिद्ध करने का जो इनसे प्राचीन हो तो फिर कोई फायदा नहीं
झल्ला कर केवल तुम अपनी सामर्थ्य हीनता का ही परिचय दे सकते हो
नहीं बिलकुल नहीं क्योंकि उसी समय में हमें यह चीज श्रीलंका में अवश्य प्राप्त होती है जिससे यह सिद्ध होता है कि यह उस समय में था सबसे बड़ी बात की चीनी यात्री यहां से ग्रन्थ लेकर गए फिर अनुवाद किया अब इसमें उन्होंने क्या सूट खोया क्या पाया कोई नहीं जान सकता पर श्रीलंका प्राचीनतम काल से ही सूत संग्रह करके रखा है इसलिए भी उसकी प्रमाणिकता है अब अगर तुम्हारे पास कोई अतिरिक्त प्रमाण नहीं है इनको बाद का सिद्ध करने का जो इनसे प्राचीन हो तो फिर कोई फायदा नहीं
झल्ला कर केवल तुम अपनी सामर्थ्य हीनता का ही परिचय दे सकते हो
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बुद्धघोष के भाष्य और चीनी के प्राचीन अनुवाद दोनों में ही यह समानता मिल रहा है कि-
अब दोनों से समांतर सिद्ध होने से इसके स्कॉलर ने बोला था कि यह पहली बौद्ध संगति के पहले अस्तित्व में होगा यह पक्का कर सकते हैं।
मतलब यह तो पक्का हो गया कि बौद्ध धम्म में तो प्राचीन काल से ही स्त्रियों को न बुद्ध बन ने का अधिकार था न ही शासिका बन ने का अधिकार था।
चीनी अनुवाद और बुद्धघोष के टिका इन दोनों ने ही इनकी पोल खोल दिया इसी पर🤣
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न स्त्री बुद्ध बन सकती है न ही स्त्री शासिका बन सकती और न ही वह शासन कर सकती हैं।
अब दोनों से समांतर सिद्ध होने से इसके स्कॉलर ने बोला था कि यह पहली बौद्ध संगति के पहले अस्तित्व में होगा यह पक्का कर सकते हैं।
मतलब यह तो पक्का हो गया कि बौद्ध धम्म में तो प्राचीन काल से ही स्त्रियों को न बुद्ध बन ने का अधिकार था न ही शासिका बन ने का अधिकार था।
चीनी अनुवाद और बुद्धघोष के टिका इन दोनों ने ही इनकी पोल खोल दिया इसी पर🤣
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पुराण प्रवचन
बुद्धघोष के भाष्य और चीनी के प्राचीन अनुवाद दोनों में ही यह समानता मिल रहा है कि- न स्त्री बुद्ध बन सकती है न ही स्त्री शासिका बन सकती और न ही वह शासन कर सकती हैं। अब दोनों से समांतर सिद्ध होने से इसके स्कॉलर ने बोला था कि यह पहली बौद्ध संगति के पहले अस्तित्व…
अब यह बोलेगा मध्यम आगम के अनुवाद में नहीं है 😭🤣
बेटा मध्यम आगम के समकालीन बुद्धघोष भी था और अगर यह उसके टिका में उद्धृत बातें भी चीनी अनुवाद में मिल रहा तो यह स्पष्ट है कि बहु धातुक सूत्र में मध्यम आगम के समकालीन ही यह बातें थी
तेरे पास कोई ठोस आधार है ही नहीं इसको बाद का जोड़ा हुआ सिद्ध करने का क्यों कि जिस 4 th - 5th century का मध्यम आगम की अनुवाद है उसी समय काल के बुद्धघोष के त्रिपिटक टिका भी है।
बेटा मध्यम आगम के समकालीन बुद्धघोष भी था और अगर यह उसके टिका में उद्धृत बातें भी चीनी अनुवाद में मिल रहा तो यह स्पष्ट है कि बहु धातुक सूत्र में मध्यम आगम के समकालीन ही यह बातें थी
तेरे पास कोई ठोस आधार है ही नहीं इसको बाद का जोड़ा हुआ सिद्ध करने का क्यों कि जिस 4 th - 5th century का मध्यम आगम की अनुवाद है उसी समय काल के बुद्धघोष के त्रिपिटक टिका भी है।
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इसी में लिखा है कि इसी का अनुवाद जो है Faxian ने किया था
और यह जो Grand Master Faxian है यह लग भाग 337-422 CE प्राचीन चीनी अनुवादक है जिसने इसका अनुवाद किया था तब।
बता दें मध्यम आगम की अनुवाद जो यह बात कर रहा वो भी इसी के थोड़ा बाद (397–398 C.E.) का है यह उस से ज्यादा प्राचीन अनुवाद है ।
The Buddha Speaks the Four Chapters of the Dharma Gate Sutra, translated by the Tripitaka Master Faxian, Grand Master of the Mingjiao School, in the Western Paradise, under imperial decree.
और यह जो Grand Master Faxian है यह लग भाग 337-422 CE प्राचीन चीनी अनुवादक है जिसने इसका अनुवाद किया था तब।
बता दें मध्यम आगम की अनुवाद जो यह बात कर रहा वो भी इसी के थोड़ा बाद (397–398 C.E.) का है यह उस से ज्यादा प्राचीन अनुवाद है ।
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यह भी ले चीन के एक बौद्ध शास्त्र फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित Faxian Translation Of Tripitaka
इसमें भी वही बात आया है कि -
इस अनुवादक Faxian का समय काल भी 337–422 CE हैं जो तेरे चीनी आगम के अनुवाद के थोड़े पहले या समकालीन ही है 🤣🤣
ले मौज काट 🤣😭
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
इसमें भी वही बात आया है कि -
स्त्री शासिका नहीं बन सकती और स्त्री बुद्ध नहीं बन सकती
इस अनुवादक Faxian का समय काल भी 337–422 CE हैं जो तेरे चीनी आगम के अनुवाद के थोड़े पहले या समकालीन ही है 🤣🤣
ले मौज काट 🤣😭
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बौद्ध मत स्त्री स्वतंत्रता की मिसाल है वहां स्त्रियां अपने भाइयों से ही विवाह कर सकती है (new refrence)
यह बात है रत्नसूत्त की जो h smith द्वारा लिप्यंतरित खुदक्क पाठ में आता है Paramatthajotikā टीका के साथ
आगे देखते है इस सूत में आता है कि एक राजा की पत्नी गर्भवती होती है उसके गर्भ से बच्चे की जगह मांस निकलता है फिर उसे नदी में बहा दिया जाता है एक बौद्ध भंते को वह मिलता है फिर वह उसे पालता है एक अदभुत चमत्कार हमें इसमें देखने को मिलता है कि उस मांस से अमीबा की तरह दो बच्चे निकलते है एक लड़का एक लड़की कुछ दिन बाद लोग बोलते है कि ये बच्चे हमे दे दो वो भिक्षु ये बात मान जाता है पर यह शर्त रखता है कि इन दोनों भाई बहनों की शादी आपस में कर देना और वो लोग मान जाते है 😂🙌 वाह मेरे धम्म
संपूर्ण मूल
यह बात है रत्नसूत्त की जो h smith द्वारा लिप्यंतरित खुदक्क पाठ में आता है Paramatthajotikā टीका के साथ
“इदानी ‘येन यदा यत्थ यस्मा च’ एतं’ति एत्थाह — केन पन एतं सुत्तं वुत्तं, कदा, कत्थ, कस्मा च वुत्तंति। इदं हि भगवता एव वुत्तं, न सावकादीहि; तञ् च …”टीकाकार कहता है कि ऐसा न समझा जाय कि यह सूत भंते जी ने कहा है ये बुद्ध ने ही कहा है
आगे देखते है इस सूत में आता है कि एक राजा की पत्नी गर्भवती होती है उसके गर्भ से बच्चे की जगह मांस निकलता है फिर उसे नदी में बहा दिया जाता है एक बौद्ध भंते को वह मिलता है फिर वह उसे पालता है एक अदभुत चमत्कार हमें इसमें देखने को मिलता है कि उस मांस से अमीबा की तरह दो बच्चे निकलते है एक लड़का एक लड़की कुछ दिन बाद लोग बोलते है कि ये बच्चे हमे दे दो वो भिक्षु ये बात मान जाता है पर यह शर्त रखता है कि इन दोनों भाई बहनों की शादी आपस में कर देना और वो लोग मान जाते है 😂🙌 वाह मेरे धम्म
महापुञ्ञा दारका; अप्पमादेन वड्डेथ, वड्डेत्वा च अञ्ञमञ्ञं आवाहविवाहं करोथ, पञ्चगोरसेन राजानं तोसेत्वा भूमिभागं गहेत्वा नगरं मापेथ, तत्र कुमारं अभिसिञ्चथ”ति।
संपूर्ण मूल
तापसो दारके पोसेन्तो उस्सुरे गामं पिण्डाय पविसति, अतिदिवा पटिक्कमति। तस्स तं व्यापारं ञत्वा गोपालका आहंसु — “भन्ते, पब्बजितानं दारकपोसनं पलिबोधो; अम्हाकं दारके देथ, मयं पोसिस्साम, तुम्हे अत्तनो कम्मं करोथा”ति। तापसो “साधू”ति पटिसुणि। गोपालका दुतियदिवसे मग्गं समं कत्वा पुप्फेहि ओकिरित्वा धजपताका उस्सापेत्वा तुरियेहि वज्जमानेहि अस्समं अगता। तापसो — “महापुञ्ञा दारका; अप्पमादेन वड्डेथ, वड्डेत्वा च अञ्ञमञ्ञं आवाहविवाहं करोथ, पञ्चगोरसेन राजानं तोसेत्वा भूमिभागं गहेत्वा नगरं मापेथ, तत्र कुमारं अभिसिञ्चथ”ति वत्वा दारके अदासि।
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