No Document No History
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🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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No Document No History
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सर सैयद अहमद खान –

1855 में, उन्होंने अबुल फ़ज़ल की 'आईन-ए-अकबरी' का विद्वतापूर्ण और सचित्र संस्करण पूरा किया। इस कृति के पहले और तीसरे खंड दोनों 1855 में प्रकाशित हुए। दूसरा खंड, जिसे 1857 में प्रकाशक को भेजा गया था, उसी वर्ष हुए विद्रोह में नष्ट हो गया। अपनी संतुष्टि के अनुसार कार्य पूरा करने के बाद, और यह मानते हुए कि मिर्ज़ा असदुल्ला खान ग़ालिब उनके परिश्रम की सराहना करेंगे, सैयद अहमद ने महान ग़ालिब से इसके लिए एक तक़रीज़ (उस समय की प्रथा के अनुसार, एक प्रशंसात्मक प्रस्तावना) लिखने का अनुरोध किया। ग़ालिब मान गए, लेकिन उन्होंने जो लिखा वह एक छोटी फ़ारसी कविता थी जिसमें 'आईन-ए-अकबरी' की निंदा की गई थी, और परोक्ष रूप से उस शाही, भव्य, साक्षर और विद्वान मुगल संस्कृति की भी, जिसकी यह कृति थी। इसके विरुद्ध कम से कम इतना तो कहा ही जा सकता है कि एक प्राचीन दस्तावेज़ के रूप में भी इस पुस्तक का कोई विशेष महत्व नहीं था। ग़ालिब ने सैयद अहमद खान को अपनी प्रतिभा और समय को निरर्थक वस्तुओं पर बर्बाद करने के लिए फटकार लगाई। इससे भी बुरा, उन्होंने "इंग्लैंड के साहबों" की अत्यधिक प्रशंसा की, जिनके पास उस समय इस दुनिया के सभी ऐनों की चाबियाँ थीं।

सर सैयद अहमद खान ने फिर कभी ऐन-ए-अकबरी की प्रशंसा में एक शब्द भी नहीं लिखा और वास्तव में इतिहास और पुरातत्व में सक्रिय रुचि लेना छोड़ दिया। उन्होंने अगले कुछ वर्षों में दो अन्य ऐतिहासिक ग्रंथों का संपादन किया, लेकिन उनमें से कोई भी ऐन-ए-अकबरी जैसा नहीं था: अकबर के शासन पर एक विशाल और विजयप्रशंसात्मक दस्तावेज।
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yah book mil jaye ga kya bhai sahab
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अभी साइट पर नहीं है bt आ जाएगी कल तक.....
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yah book mil jaye ga kya bhai sahab
ऐसी किताबें तो हम पहले भेजते हैं
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महाभोज मनु भंडारी.pdf
1.4 MB
महाभोज का सभी आनंद उठाएं 😂✌🌹
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No Document No History
महाभोज मनु भंडारी.pdf
Mahabhoj :- Mannu Bhandari
महाभोज :- मन्नू भण्डारी
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NET DEC 2025 FINAL .pdf
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SOLVED UGC NET HISTORY DEC 2025
कुल पूछे गए प्रश्न
1. प्राचीन भारत– 27
2. मध्यकालीन भारत –27
3. आधुनिक भारत – 34
4. इतिहास लेखन – 12

सभी प्रश्नों के उत्तर यूजीसी द्वारा 04 फरवरी 2025 को जारी फाइनल आंसर की पर आधारित है।
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डार्क होर्स.pdf
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रेत की मछली KANTA BHARTI.pdf
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रेत की मछली KANTA BHARTI.pdf
रेत की मछली कान्ता भारती


खा लो रेत् की मछली 🐠😂🤣

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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
गोदान,_उपन्यास,_लेखक_मुंशी_प्रेमचंद।.pdf
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इतिहास दर्शन
NET DEC 2025 FINAL .pdf
144 का तीन उत्तर सही माने ✅

गलती से 4 नंबर का हाईलाइट हुआ है ✨✅
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कांग्रेस के अधिवेशन पर चर्चा 📖✍️
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✅डूम्सडे क्लॉक🕚 अब मध्यरात्रि से 89 सेकंड दूर है

डूम्सडे क्लॉक🧭 क्या है?

डूम्सडे क्लॉक एक प्रतीकात्मक घड़ी है जो यह दर्शाती है कि हम “अपनी ही बनाई गई खतरनाक तकनीकों से अपनी दुनिया को नष्ट करने” के कितने करीब हैं।

डूम्सडे क्लॉक कब और क्यों बनाई गई थी?

*️⃣द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम💥 का उपयोग किया गया।

*️⃣वैज्ञानिकों ने महसूस किया कि परमाणु हथियार💣 मानवता को नष्ट कर सकते हैं।

*️⃣यह घड़ी 1947 में बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स (BAS) द्वारा बनाई गई थी, जिसे दो साल पहले वैज्ञानिकों अल्बर्ट आइंस्टीन, जे रॉबर्ट ओपेनहाइमर और यूजीन रैबिनोविच ने शिकागो विश्वविद्यालय के विद्वानों के साथ मिलकर स्थापित किया था।

🕒 डूम्सडे क्लॉक का वर्तमान समय (2026)

*️⃣डूम्सडे क्लॉक अब मध्यरात्रि से 85 सेकंड दूर सेट की गई है — इतिहास में अब तक की सबसे निकटतम स्थिति।

*️⃣इसका अर्थ है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान में मानवता के लिए वैश्विक जोखिम अत्यंत उच्च हैं।

वर्तमान सेटिंग के मुख्य कारण

इस सेटिंग के कई कारण हैं:

1️⃣ परमाणु हथियार और वैश्विक संघर्ष

*️⃣शक्तिशाली देशों के बीच बढ़ता तनाव।
*️⃣परमाणु हथियारों की दौड़ और संभावित परमाणु युद्ध का खतरा।
*️⃣अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमी और बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता।

2️⃣ जलवायु परिवर्तन संकट

*️⃣रिकॉर्ड तोड़ वैश्विक तापमान।
समुद्र स्तर में वृद्धि, चरम मौसम, पिघलते ग्लेशियर।
*️⃣उत्सर्जन को कम करने में देशों की धीमी प्रगति।

3️⃣ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी जोखिम
*️⃣मजबूत वैश्विक नियमों के बिना एआई का तीव्र विकास।
*️⃣युद्ध में या गलत सूचना फैलाने में संभावित दुरुपयोग।

4️⃣ जैविक खतरे और महामारियाँ

*️⃣भविष्य की महामारियों या जैव प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग का खतरा।

5️⃣ वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता और गलत सूचना

*️⃣राष्ट्रों के बीच सहयोग में कमी।
*️⃣गलत सूचना का प्रसार जो विश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर करता है।


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🔔 न्यू स्टार्ट संधि समाप्त: दुनिया को बड़ा खतरा! 🌍🚨

📌 New START (Strategic Arms Reduction Treaty) — अमेरिका और रूस के बीच आख़िरी परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता — 5 फ़रवरी 2026 को समाप्त हो गया। अब इन दोनों देशों के बीच कोई बाध्यकारी परमाणु सीमाएँ नहीं बचीं।

📌 संक्षिप्त में क्या था न्यू स्टार्ट?

📍 यह संधि 2010 में हस्ताक्षरित हुई थी और 1,550 रणनीतिक परमाणु वारहेड तथा 700 मिसाइल/डिलीवरी सिस्टम तक सीमाएँ तय करती थी।
📍 साथ ही डेटा साझा करना, सूचना देना और साइट निरीक्षण जैसी पारदर्शिता व्यवस्था भी थी।

⚠️ अब क्या बदल गया?

🔻 5 फ़रवरी 2026 से यह संधि अधिकारिक रूप से समाप्त हो गई और अब अमेरिका-रूस के बीच कोई बाध्यकारी परमाणु नियंत्रण नहीं बचा।
🔻 इससे जुड़े पारदर्शिता और भरोसे के तंत्र भी अब खत्म हो चुके हैं।

🌍 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

💥 संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे “गंभीर और खतरनाक क्षण” बताया, क्योंकि अब विश्व के सबसे बड़े परमाणु हथियार रखने वाले देशों पर कोई कानूनी सीमा नहीं है।

📈 कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एक नई परमाणु हथियार दौड़ तेज़ हो सकती है, क्योंकि अब दोनों देश बिना सीमा के अपने हथियार बढ़ा सकते हैं।

💡 क्यों यह खबर हमारी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है?

⭐ यह इतिहास में पहली बार है जब अमेरिका-रूस में कोई परमाणु नियंत्रण संधि लागू नहीं है।
⭐ इससे वैश्विक तनाव, अनिश्चितता और युद्ध की सम्भावनाएँ बढ़ सकती हैं।
⭐ इसके बावजूद नेतागण नई संधि या बातचीत की जरूरत पर जोर दे रहे हैं, ताकि शांति और विश्वास बनाए रखा जा सके।

📣 सारांश:
🔹 न्यू स्टार्ट संधि अब खत्म हो गई है।
🔹 अब अमेरिका-रूस के बीच किसी भी तरह की परमाणु सीमा या निगरानी नहीं है।
🔹 इससे वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।
🔹 दुनिया भर के नेताओं को नई शांति संधियों की आवश्यकता है।

source = https://www.icanw.org/new_start_expiration

#AcharyaPrashant #CurrentAffairs #History

Posted by मुरली on Acharya Prashant's Gita Mission App.

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