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नाम - Mahatma gandhi and his apostles
लेखक - वेद मेहता
पृष्ठ - 280
भाषा - अंग्रेजी
----------»Join«----------
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・・・・・・・・・
📖📚📕
#Esamidha #PDF #Books
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आज शरिया कानून का नाम आते ही बहुत से लोगों के दिमाग़ में यह आता है कि यह तो बस महिलाओं को ग़ुलाम बनाने, हिंसा करने और बच्चियों की शादी कराने का जरिया है। लेकिन सवाल यह है.. क्या हम शरिया का असली मतलब जानते हैं?
असल शरिया क्या था?
शरिया का अर्थ है “साफ़ रास्ता” — यानी इंसान को सही जीवन की ओर ले जाने वाला रास्ता।
इसमें मुख्य स्रोत थे: क़ुरआन, हदीस (पैग़म्बर के कथन और काम), और बाद में विद्वानों की राय।
शुरुआती दौर में शरिया का मकसद था इंसाफ़, दया और समाज की भलाई।
महिलाओं को विरासत और संपत्ति के अधिकार मिले, जो उस ज़माने में क्रांतिकारी थे।
गरीबों की मदद के लिए ज़कात (दान) अनिवार्य थी।
अपराधों की सज़ा बहुत सख़्त सबूतों पर ही दी जाती थी, ताकि निर्दोष न फँसे।
🛑 लेकिन बाद में क्या हुआ?
पैग़म्बर की असली शिक्षा को बाद में फिक़ह (धार्मिक कानून), इज्तिहाद (विद्वानों की राय), और स्थानीय रिवाज़ों के साथ मिला दिया गया।
धीरे-धीरे असल मकसद — न्याय और दया — पीछे चला गया, और सामने रह गया सिर्फ़ कठोर नियम।
कई जगहों पर शासकों और धार्मिक नेताओं ने शरिया का इस्तेमाल सत्ता बचाने और जनता को दबाने के लिए किया।
महिलाओं की आज़ादी, पढ़ाई और बराबरी छीन ली गई।
तालिबान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है — उन्होंने शरिया के नाम पर लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी लगाई, महिलाओं को घर तक सीमित किया और समाज पर सख़्त नियंत्रण थोप दिया।
शरिया का मकसद कभी भी डर और दबाव बनाना नहीं था। यह तो इंसान को सही रास्ते, न्याय और दया की ओर ले जाने के लिए था। लेकिन आज इसे गलत तरीके से सिर्फ़ सत्ता और नियंत्रण का औज़ार बना दिया गया है।
पूरी जानकारी इस वीडियो मे:
https://youtu.be/Fzk7H6y65LE?si=U7FesbvTn2_9PbON
#AcharyaPrashant #History #WomenEmpowerment #Books
Posted by Jitendra Advait on Acharya Prashant's Gita Mission App.
Download Now -
https://app.acharyaprashant.org/?id=8-0e7335a2-fc61-4a2a-b824-ddb5039ddf76&cmId=m00076
असल शरिया क्या था?
शरिया का अर्थ है “साफ़ रास्ता” — यानी इंसान को सही जीवन की ओर ले जाने वाला रास्ता।
इसमें मुख्य स्रोत थे: क़ुरआन, हदीस (पैग़म्बर के कथन और काम), और बाद में विद्वानों की राय।
शुरुआती दौर में शरिया का मकसद था इंसाफ़, दया और समाज की भलाई।
महिलाओं को विरासत और संपत्ति के अधिकार मिले, जो उस ज़माने में क्रांतिकारी थे।
गरीबों की मदद के लिए ज़कात (दान) अनिवार्य थी।
अपराधों की सज़ा बहुत सख़्त सबूतों पर ही दी जाती थी, ताकि निर्दोष न फँसे।
🛑 लेकिन बाद में क्या हुआ?
पैग़म्बर की असली शिक्षा को बाद में फिक़ह (धार्मिक कानून), इज्तिहाद (विद्वानों की राय), और स्थानीय रिवाज़ों के साथ मिला दिया गया।
धीरे-धीरे असल मकसद — न्याय और दया — पीछे चला गया, और सामने रह गया सिर्फ़ कठोर नियम।
कई जगहों पर शासकों और धार्मिक नेताओं ने शरिया का इस्तेमाल सत्ता बचाने और जनता को दबाने के लिए किया।
महिलाओं की आज़ादी, पढ़ाई और बराबरी छीन ली गई।
तालिबान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है — उन्होंने शरिया के नाम पर लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी लगाई, महिलाओं को घर तक सीमित किया और समाज पर सख़्त नियंत्रण थोप दिया।
शरिया का मकसद कभी भी डर और दबाव बनाना नहीं था। यह तो इंसान को सही रास्ते, न्याय और दया की ओर ले जाने के लिए था। लेकिन आज इसे गलत तरीके से सिर्फ़ सत्ता और नियंत्रण का औज़ार बना दिया गया है।
पूरी जानकारी इस वीडियो मे:
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Gravitas Plus | The Sharia Law
Gravitas Plus | The Taliban want to impose their version of the Sharia Law in Afghanistan. What is the Sharia? Why is it controversial? Why are Sharia laws different in different countries? WION's Palki Sharma explains the history, interpretations & debates…
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No Trophies, Just Play — क्यों भारत के होनहार छात्र थक रहे हैं 💔
🧠 कभी सोचा है?
जो बच्चे कल के “भविष्य” कहे जाते हैं,
वो आज ही थक चुके हैं... टूट चुके हैं... 🥀
हर ओर बस दौड़ है —
📚 मार्क्स की,
🏆 रैंक की,
💼 नौकरी की,
और एक ऐसे “परफेक्ट जीवन” की, जो कभी आता ही नहीं।
लेकिन इस दौड़ में कुछ खो गया है —
पढ़ने की खुशी, सीखने की चाहत, और सबसे बड़ी चीज़ स्वयं को जानना ।
👨🏫 स्कूल कहता है — “और मेहनत करो।”
माता-पिता कहते हैं — “बस थोड़ा और, फिर सब ठीक हो जाएगा।”
पर कोई नहीं पूछता — “तुम ठीक तो हो ना?” 💔
बच्चे ठहर नहीं सकते, क्योंकि ठहरना “पीछे रह जाना” कहलाता है।
📊 ये सिर्फ तनाव नहीं — ये एक चुप्पी की महामारी है।
👉 2023 में 13,892 छात्रों ने अपनी जान ले ली।
यह संख्या सिर्फ एक आँकड़ा नहीं है —
हर संख्या के पीछे एक सपना था, एक उम्मीद थी, एक मुस्कान थी। 🌧️
और आंकड़े बताते हैं —
तमिलनाडु, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र —
यहाँ डिप्रेशन की दर सबसे ऊँची है।
पर सच्चाई यह है कि हर शहर, हर गली में कोई न कोई बच्चा
“खुश दिखने की कोशिश” कर रहा है।
🌱 हमने बच्चों को सिखाया — “पहले कुछ बनो, फिर खुश रहना।”
पर क्या यह गलत दिशा नहीं है?
क्या हमने कभी कहा —
“पहले खुद को समझो, फिर जो समझ आए कि ये है जिसे वो जिंदगी दे सकता है , उस क्षेत्र में उतर सकता है प्रेम पूर्वक बिना डरे ?
हम सबने “सफलता” को इतना बड़ा बना दिया,
कि जिंदगी सार्थक बनाने की जगह वो अपनी जान ले लेता है ।
📖 जब मैंने आचार्य जी की किताब “Truth Without Apology” को पढ़ा तो उसमें चैप्टर 30 जिसका नाम —
🌸 “No Trophies, Just Play”
वहाँ पर आचार्य जी ने बताया —
“Complete within, you are free to engage in energetic action, vigorous doing, without having a particular fruit in mind.”
खेल ही उस केंद्र से शुरू किया है जो पूर्ण है l
उस केंद्र से नहीं जहां किसी ने बता दिया कि तुम्हे यह हासिल करना तो दौड़ो l
यही तो “Play” है —
जहाँ लक्ष्य सिर्फ खेलना होता है,
ना कि ट्रॉफी जीतना। 🪶
🎓 आज के छात्र अगर खुद से बस एक सवाल पूछ लें —
“क्या मुझे पढ़ाई में आनंद आता है,
या मैं सिर्फ डर से पढ़ रहा हूँ?”
तो शायद बहुत कुछ बदल जाएगा।
क्योंकि पढ़ाई अगर खेल बन जाए,
तो जिंदगी फिर कभी बोझ नहीं लगती क्योंकि पढ़ने में ही मौज है। 🌈
🌻 शिक्षा का असली अर्थ यही है —
जहाँ ज्ञान, आनंद बन जाए।
जहाँ कक्षा, कैदखाना नहीं, खेल का मैदान हो।
फिर ना मतलब है कोई ट्रॉफी से, ना तालियों से।
Source - https://www.timesnownews.com/education/world-mental-health-day-2025-the-high-cost-of-high-scores-why-indias-brightest-students-are-burning-out-article-152969187
#AcharyaPrashant #CurrentAffairs #Parenting #Books
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🧠 कभी सोचा है?
जो बच्चे कल के “भविष्य” कहे जाते हैं,
वो आज ही थक चुके हैं... टूट चुके हैं... 🥀
हर ओर बस दौड़ है —
📚 मार्क्स की,
🏆 रैंक की,
💼 नौकरी की,
और एक ऐसे “परफेक्ट जीवन” की, जो कभी आता ही नहीं।
लेकिन इस दौड़ में कुछ खो गया है —
पढ़ने की खुशी, सीखने की चाहत, और सबसे बड़ी चीज़ स्वयं को जानना ।
👨🏫 स्कूल कहता है — “और मेहनत करो।”
माता-पिता कहते हैं — “बस थोड़ा और, फिर सब ठीक हो जाएगा।”
पर कोई नहीं पूछता — “तुम ठीक तो हो ना?” 💔
बच्चे ठहर नहीं सकते, क्योंकि ठहरना “पीछे रह जाना” कहलाता है।
📊 ये सिर्फ तनाव नहीं — ये एक चुप्पी की महामारी है।
👉 2023 में 13,892 छात्रों ने अपनी जान ले ली।
यह संख्या सिर्फ एक आँकड़ा नहीं है —
हर संख्या के पीछे एक सपना था, एक उम्मीद थी, एक मुस्कान थी। 🌧️
और आंकड़े बताते हैं —
तमिलनाडु, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र —
यहाँ डिप्रेशन की दर सबसे ऊँची है।
पर सच्चाई यह है कि हर शहर, हर गली में कोई न कोई बच्चा
“खुश दिखने की कोशिश” कर रहा है।
🌱 हमने बच्चों को सिखाया — “पहले कुछ बनो, फिर खुश रहना।”
पर क्या यह गलत दिशा नहीं है?
क्या हमने कभी कहा —
“पहले खुद को समझो, फिर जो समझ आए कि ये है जिसे वो जिंदगी दे सकता है , उस क्षेत्र में उतर सकता है प्रेम पूर्वक बिना डरे ?
हम सबने “सफलता” को इतना बड़ा बना दिया,
कि जिंदगी सार्थक बनाने की जगह वो अपनी जान ले लेता है ।
📖 जब मैंने आचार्य जी की किताब “Truth Without Apology” को पढ़ा तो उसमें चैप्टर 30 जिसका नाम —
🌸 “No Trophies, Just Play”
वहाँ पर आचार्य जी ने बताया —
“Complete within, you are free to engage in energetic action, vigorous doing, without having a particular fruit in mind.”
खेल ही उस केंद्र से शुरू किया है जो पूर्ण है l
उस केंद्र से नहीं जहां किसी ने बता दिया कि तुम्हे यह हासिल करना तो दौड़ो l
यही तो “Play” है —
जहाँ लक्ष्य सिर्फ खेलना होता है,
ना कि ट्रॉफी जीतना। 🪶
🎓 आज के छात्र अगर खुद से बस एक सवाल पूछ लें —
“क्या मुझे पढ़ाई में आनंद आता है,
या मैं सिर्फ डर से पढ़ रहा हूँ?”
तो शायद बहुत कुछ बदल जाएगा।
क्योंकि पढ़ाई अगर खेल बन जाए,
तो जिंदगी फिर कभी बोझ नहीं लगती क्योंकि पढ़ने में ही मौज है। 🌈
🌻 शिक्षा का असली अर्थ यही है —
जहाँ ज्ञान, आनंद बन जाए।
जहाँ कक्षा, कैदखाना नहीं, खेल का मैदान हो।
फिर ना मतलब है कोई ट्रॉफी से, ना तालियों से।
Source - https://www.timesnownews.com/education/world-mental-health-day-2025-the-high-cost-of-high-scores-why-indias-brightest-students-are-burning-out-article-152969187
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Times Now
The High Cost of High Scores: Why India’s Brightest Students Are Burning Out
As India celebrates toppers and record-breaking marks, experts warn of a growing mental health epidemic: academic burnout, that is driven by relentless competition, coaching pressures, and social media comparisons., Education, Times Now
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Listen, Little Man!.pdf
37.3 MB
Listen, Little Man! by Wilhelm Reich
#Books
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Forwarded from History By Devpal Charan
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सम्पूर्ण जानकारी..मुख्य विषय वीडियो का
1:- पुस्तक किस भर्ती परीक्षा हेतु उपयोगी होगी
2:- पुस्तक निर्माण और व्याख्या में किन सोर्स का प्रयोग किया गया
3:- कितने पेज क्या पढ़ना क्या ज़रूरी कैसे तैयार करना है पाठ्यक्रम संबंधित जानकारी
4:- किन किन भर्ती परीक्षाओं के PYQ ( पुराने भर्ती परीक्षा पेपर) को शामिल किया है..
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मध्यकालीन भारत वस्तुनिष्ठ ( रवि कुलरिया)
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2:- पुस्तक निर्माण और व्याख्या में किन सोर्स का प्रयोग किया गया
3:- कितने पेज क्या पढ़ना क्या ज़रूरी कैसे तैयार करना है पाठ्यक्रम संबंधित जानकारी
4:- किन किन भर्ती परीक्षाओं के PYQ ( पुराने भर्ती परीक्षा पेपर) को शामिल किया है..
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मध्यकालीन भारत वस्तुनिष्ठ 2nd Edition | Ravi Kulria | Devpal Charan | #UGCNET #rpsc #1stgrade |
मध्यकालीन भारत वस्तुनिष्ठ (2nd Edition) पुस्तक का संपूर्ण रिव्यू! यदि आप RPSC 1st Grade, PGT, TGT, KVS, NVS, UGC NET, SET, Assistant Professor या किसी भी State PCS परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह वीडियो आपके लिए बेहद उपयोगी है।
#MadhyakalinBharat #RaviKula…
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